जीका वायरस का बढ़ता प्रकोप, जानिये लक्षण और बचने के उपाय - .

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Tuesday, 9 October 2018

जीका वायरस का बढ़ता प्रकोप, जानिये लक्षण और बचने के उपाय

जीका वायरस का बढ़ता प्रकोप, जानिये लक्षण और बचने के उपाय

राजस्थान में जीका वायरस पीड़ितों की संख्या बढ़ गई है। अब तक 29 लोग इस संक्रमण की गिरफ्त में आ चुके हैं। प्रदेश की अडिशनल चीफ सेक्रटरी (हेल्थ) वीनू गुप्ता ने बताया कि अबतक 29 लोगों के सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं। राजस्‍थान में जीका वायरस संक्रमण के मामलों को लेकर पीएमओ ने स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय से विस्‍तृत रिपोर्ट मांगी है। जीका वायरस दिन में एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है। इस बीमारी में बुखार के साथ जोड़ों में दर्द और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसका कोई टीका नहीं है, न ही कोई ख़ास उपचार है। आइये जानते हैं इससे जुड़ी कुछ अहम जानकारियां। इस समय पूरी दुनिया में इस वायरस को लेकर एक अफरा-तफरी सी मची हुई है। लोगों में इस नाम का डर घर करने लगा है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय डर की जगह सतर्क रहने की ज्यादा जरूरत है।
इस डर की वजह :- जिका वायरस का नाम यूं नया नहीं है कि यह दशकों पहले भी लोगों पर हमला कर चुका है लेकिन उस वक्त इसका असर आज से अलग था। इसे लेकर फैले डर की खास वजह नवजात शिशुओं में इसके कारण होने वाली तकलीफें हैं। इसी वजह से दुनियाभर में इसे लेकर एक तरह से अलर्ट जारी कर दिया गया है। यह वायरस भी मच्छर की वजह से फैलता है। दिन में एक्टिव रहने वाले इस मच्छर की प्रजाति का नाम 'एडीज' है। इन मच्छरों को इनके शरीर पर स्थित काली-सफेद डिजाइन के कारण अलग ही पहचाना जा सकता है। जिका वायरस के अतिरिक्त इसकी अलग-अलग प्रजातियों से डेंगू, यलो फीवर, जैपनीज इनसिफेलाइटिस जैसी बीमारियां भी फैलती हैं। जिका वायरस मनुष्यों तक जिका फीवर को पहुंचाता है।
बचाव आवश्यक है :- वयस्कों के अलावा चूंकि इस वायरस का असर गर्भ में पल रहे शिशु तक भी खासतौर पर होता है। इसलिए इसे लेकर सजगता रखनी आवश्यक है। यह संक्रमण गर्भवती मां से शिशु तक पहुंच सकता है। इसके कारण नवजात में ब्रेन डिफेक्ट के साथ ही अन्य गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं जिनमें गुलियन बेरी सिंड्रोम भी शामिल है,विभिन्न् शोध इससे जुड़े प्रमाण दे चुके हैं। वैसे हमारे देश में इससे बचाव के लिए टीका बना लेने का दावा किया जा रहा है।
बुखार शरीर पर रैशेस, कंजक्टिवाइटिस या लाल आंखें, जोड़ों में और बदन में दर्द, नवजात शिशुओं में जन्म से ही कई असामन्यताओं जैसे सिर के आकार का असामान्य होना सिरदर्द, आदि।
सर्वोत्तम उपाय :- इस वायरस को लेकर सबसे ज्यादा जरूरत सजगता रखने की है। दुनियाभर के विशेषज्ञ इस संदर्भ में पहला कदम हाइजीन और स्वच्छता को अपनाने के लिए उठाने की बात कह रहे हैं। गंदगी और इसके कारण पनपने वाले मच्छरों का प्रबंधन मुख्य लक्ष्य होना चाहिए। इसके लिए इन बातों पर ध्यान दें :-  मच्छरों को अपने आस-पास इकठ्ठा होने से रोकने के उपाय करें, मच्छरदानी या मच्छरों से बचाव के साधन नियमित प्रयोग में लाएं, खासतौर पर दिन में मच्छरों से अपना बचाव करें। ये मच्छर सुबह और शाम ढलने से कुछ समय पहले विशेषकर क्रियाशील होते हैं, गर्भवती महिलाओं के मामले में अतिरिक्त सतर्कता रखें, यह संक्रमण यौन संबंधों के द्वारा भी फैल सकता है। इसलिए इसे लेकर भी सतर्क रहें, यदि लक्षण नजर आएं तो तुरंत जांच करवाएं, मरीज के लिए दवाई के साथ ही पूरा रेस्ट आवश्यक है, इलाज के दौरान पर्याप्त मात्रा में लिक्विड डाइट लेने का ध्यान रखें, अपने मन से कोई भी दवाई लेने से बचें।

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