तीन साल में डेढ़ गुना हुए करोड़पति करदाता - .

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Monday, 22 October 2018

तीन साल में डेढ़ गुना हुए करोड़पति करदाता

तीन साल में डेढ़ गुना हुए करोड़पति करदाता

कालेधन के खिलाफ सरकार की मुहिम धीरे-धीरे असर दिखा रही है। सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या तीन साल में डेढ़ गुनी हो गई है। आयकर विभाग के समक्ष एक करोड़ रुपये से अधिक आय बताने वाले व्यक्तिगत करदाताओं की संख्या भी बढ़कर 81,344 हो गई है।
वहीं रिटर्न दाखिल करने वाले नए करदाताओं का आंकड़ा इस साल सवा करोड़ तक पहुंचने के आसार हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अनुसार, आकलन वर्ष (असेसमेंट ईयर) 2017-18 के लिए कुल 4.98 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल हुए। इसमें 9,22,517 करदाता ऐसे थे, जिन्होंने अपनी आय शून्य दिखाई, जबकि 303 करदाताओं ने अपनी आय 500 करोड़ रुपये से भी अधिक दिखाई। इन करदाताओं में व्यक्तिगत करदाता, कॉरपोरेट, फर्म और अभिवाजित हिंदू परिवार के रूप में रिटर्न दाखिल करने वाले करदाता शामिल हैं। आकलन वर्ष 2017-18 में 1,40,139 करदाताओं ने अपनी सालाना आय एक करोड़ रुपये से अधिक बताई, जबकि 2014-15 में ऐसे करदाताओं की संख्या 88,649 थी। इस तरह इसमें भारी भरकम 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
खास बात यह है कि इस अवधि में एक करोड़ रुपये सालाना आय वाले व्यक्तिगत करदाताओं की संख्या भी 68 प्रतिशत वृद्धि के साथ आकलन वर्ष 2017-18 में बढ़कर 81,344 हो गई है, जबकि आकलन वर्ष 2014-15 में यह 48,416 थी।

इसका मतलब यह है कि आधिकारिक तौर पर देश में 81,344 लोग करोड़पति हैं। सीबीडीटी के अध्यक्ष सुशील चंद्रा का कहना है कि सरकार ने हाल के वर्षों में जो विधायी, प्रशासनिक और प्रवर्तनकारी कदम उठाए हैं, उसके नतीजतन कर आधार बढ़ा है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 में कुल 3.79 करोड़ रिटर्न दाखिल हुए थे, जबकि 2017-18 में यह आंकड़ा बढ़कर 6.85 करोड़ हो गया।
चालू वित्त वर्ष में भी 20 अक्टूबर तक 5.8 करोड़ करदाता रिटर्न दाखिल कर चुके हैं, जबकि पिछले वित्त वर्ष में समान अवधि तक यह आंकड़ा 3.60 करोड़ था। इस संख्या के अभी और बढ़ने की उम्मीद है। कर आधार बढ़ने के साथ-साथ रिटर्न दाखिल करने वाले नए करदाताओं की संख्या में भी खासी वृद्धि हुई है। मसलन, वित्त वर्ष 2017-18 में 1.06 करोड़ नए करदाताओं ने रिटर्न दाखिल किया, जबकि चालू वित्त वर्ष में विभाग को यह आंकड़ा सवा करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। सीबीडीटी के मुताबिक, आकलन वर्ष 2014-15 से 2017-18 के दौरान वेतनभोगी करदाताओं की संख्या भी 1.7 करोड़ से बढ़कर 2.33 करोड़ हो गई है। इस अवधि में वेतनभोगी करदाताओं की संख्या में 37 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि गैर-वेतन वाले व्यक्गित करदाताओं की संख्या इस अवधि में 27 प्रतिशत वृद्धि के साथ 1.95 करोड़ से बढ़कर 2.33 करोड़ हो गई है।

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