चुटका परमाणु संयंत्र बना तो मिट जाएगा नर्मदा का अस्तित्व, इस तरह पड़ेगा पूरे प्रदेश पर असर - .

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Monday, 29 October 2018

चुटका परमाणु संयंत्र बना तो मिट जाएगा नर्मदा का अस्तित्व, इस तरह पड़ेगा पूरे प्रदेश पर असर

चुटका परमाणु संयंत्र बना तो मिट जाएगा नर्मदा का अस्तित्व, इस तरह पड़ेगा पूरे प्रदेश पर असर

मंडला में चुटका परमाणु संयंत्र बन गया तो नर्मदा नदी बर्बाद हो जाएगी। परमाणु संयंत्र से निकलने वाले जहरीले कचरे से नदी का पानी दूषित होगा। भोपालवासियों को दूषित पानी ही पीना पड़ेगा। वातावरण में फैलने वाली गैसों का स्तर बढ़ेगा। लोग बीमारियों का शिकार होंगे।
ये बातें संयुक्त राष्ट्र संघ के जलवायु परिवर्तन सलाहकार परिषद के सदस्य व वैज्ञानिक डॉ. सौम्य दत्ता ने कही। वे भोपाल के गांधी भवन में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के दुष्परिणामों पर शनिवार से चल रहे दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे। उन्होंने रविवार को पत्रकारों से चर्चा में यय बातें कही। यह सम्मेलन चुटका परमाणु विरोधी संषर्घ समिति मंडला ने बुलाया था। इसमें कुंडनकुलन परमाणु संयंत्र के विरोधी डॉ. एसपी उदय कुमार, जैतापुर संयंत्र की विरोधी डॉ. वैशाली पाटिल व चुटका संयंत्र के विरोधी राजकुमार सिन्हा व नवरत्न दुबे भी मौजूद थे।

संयंत्र का विरोध करने वालों ने बताया कि क्षेत्र के किसान व लोगों ने अभी तक 2500 आपत्तियां लगाईं हैं। इसके अलावा राज्यपाल, मुख्यमंत्री और सरकार को पत्र भी लिखे हैं। सभी में संयंत्र को लेकर विरोध दर्ज कराया गया। लेकिन आपत्तियों का निराकरण नहीं किया जा रहा है। पत्रों का जवाब भी नहीं मिला। क्षेत्र की जनता संयंत्र लगाने के पहले खुला संवाद चाहती है। लेकिन, शासन तैयार नहीं है। चोरी-चुपके क्षेत्र में काम चल रहा है। लोगों को भ्रमित कर पक्ष में करने के काम हो रहे हैं। तरह-तरह का लालच दिया जा रहा है।

नर्मदा का अस्तित्व खत्म होगा :- संयंत्र के लिए नर्मदा व बरगी बांध से पानी लिया जाएगा। इस पानी को वापस बांध व नर्मदा में छोड़ेंगे। यह पानी दूषित होगा, जो समूचे पानी के तापमान में बढ़ोत्तरी करेगा और उसे जहरीला बनाएगा। इस तरह जलीय सिस्टम तहस-नहस होगा। जलीय सिस्टम बर्बाद होगा। पानी पीने योग्य नहीं बचेगा।

मछुआरों की जीविका पर संकट :- पानी के दूषित होने व तापमान बढ़ने के साथ मछली पालन करना मुश्किल होगा। हजारों मछुआरों की जीविका खतरे में पड़ेगी।

बीमारियों का खतरा बढ़ेगा :- वैज्ञानिक डॉ. सौम्य दत्ता ने बताया कि परमाणु संयंत्र हर 15 दिन में हानिकारक गैसें वातावरण में छोड़ता है। यह बातें किसी को पता नहीं होती। यदि संयंत्र बना तो चुटका में भी यही होगा। इससे मप्र में बीमारियों का खतरा बढ़ेगा। क्योंकि संयंत्र से निकलने वाली गैसों में भारी तत्व होते हैं जो हवा में मिलकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाएंगे।

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