सबरीमाला में तनाव, महिलाओं को पवित्र पर्वत पर जाने से रोका, बुधवार को खुलेगा मंदिर का द्वार - .

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Tuesday, 16 October 2018

सबरीमाला में तनाव, महिलाओं को पवित्र पर्वत पर जाने से रोका, बुधवार को खुलेगा मंदिर का द्वार

सबरीमाला में तनाव, महिलाओं को पवित्र पर्वत पर जाने से रोका, बुधवार को खुलेगा मंदिर का द्वार

बुधवार को केरल के सबरीमाला मंदिर में मासिक पूजा के लिए मुख्य द्वार 'निलाक्कल' खुलने से पहले भारी तनाव व्याप्त हो गया है। भगवान अयप्पा के भक्तों ने प्रतिबंधित उम्र (10 से 50 साल) की महिलाओं और उनके वाहनों को पवित्र पर्वत पर जाने से रोक दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हर उम्र की महिलाओं के लिए मंदिर में प्रवेश की इजाजत दिए जाने के बाद यह पहला मौका है जब परंपरानुसार मंदिर में दर्शन शुरू होने वाले हैं। 
किसी भक्त को नहीं रोकने देंगे : विजयन सबरीमाला मंदिर पारिस्थिकीय रूप से संवेदनशील पश्चिम घाट की पर्वत श्रृंखला पर स्थित है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा है कि किसी को सबरीमाला जाने वाले भक्तों को रोकने की इजाजत नहीं होगी। सरकार किसी को भी कानून हाथ में नहीं लेने देगी और न ही सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। कोर्ट के आदेश को लागू किया जाएगा।
मंदिर से 20 किमी पहले महिलाएं ही रोक रहीं पर्वत शिखर पर स्थित सबरीमाला मंदिर से करीब 20 किमी पहले निलाक्कल द्वार के पास स्थित आधार शिविर पर महिला भक्तों व वरिष्ठ नागरिकों के समूह वहां पहुंचने वाले हर वाहन को रोक रहे हैं। ये भक्त निजी वाहनों के अलावा सरकारी बसों को भी रोक कर युवा महिलाओं को उतरने को कह रहे हैं। मौके पर बहुत कम संख्या में पुलिस बल मौजूद था। 10 से 50 की उम्र वाली महिला को नहीं जाने देंगे एक महिला आंदोलनकारी ने धमकी भरे शब्दों में कहा कि 10 से 50 साल के बीच की उम्र वाली महिलाओं को पूजा के लिए निलाक्कल के आगे नहीं जाने दिया जाएगा। मंदिर मलयालम माह 'थुलाम' के मौके पर सिर्फ पांच दिन यानी 22 अक्टूबर तक ही खुला रहेगा।
केंद्र अध्यादेश जारी करे : सांसद एंटोनी उधर, सबरीमाला के लोस निर्वाचन क्षेत्र पथनमथिट्टा के सांसद एंटो एंटोनी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह अध्यादेश जारी कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलट दे। उन्होंने कांग्रेस के महिला संगठन, मुस्लिम लीग व केरल कांग्रेस (एम) के धरने के मौके पर यह मांग की। ये दल सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विरोध कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को दिया था आदेश सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 28 सितंबर को आदेश दिया था कि सबरीमाला में हर उम्र की महिलाएं प्रवेश व दर्शन कर सकेंगी। 10 से 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं पर पाबंदी की परंपरा लिंगभेद है। मंदिर की परंपरा है कि जिन महिलाओं को मासिक धर्म होता है, उन्हें दर्शन की इजाजत नहीं है, क्योंकि भगवान अयप्पा को ब्रह्मचारी माना जाता है।

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