10 साल की समायरा का कारनामा, कोडिंग सीखाने के लिए बनाया गेम - .

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Monday, 29 October 2018

10 साल की समायरा का कारनामा, कोडिंग सीखाने के लिए बनाया गेम

10 साल की समायरा का कारनामा, कोडिंग सीखाने के लिए बनाया गेम

दस साल की छोटी उम्र खेलने-कूदने और शरारत करने की होती है। इस उम्र में स्कूल के होमवर्क के साथ मस्ती की जुगलबंदी के रंग भी काफी भरे जाते हैं, लेकिन 10 साल की समायरा मेहता ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी दाद तकनीक के बड़े जानकार दे रहे हैं। 8 साल कि उम्र में समायरा ने सॉफ्टवेअर कोडिंग की दुनिया में कदम रखते हुए बच्चों के कोडिंग सीखाने के लिए 'कोडरबुनज' नाम का गेम बनाया है। समायरा के द्वारा बनाए गए गेम को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है और वह बच्चों के लिए कई वर्कशॉप भी आयोजित कर चुकी है, इसमें से कई गूगल पर दिए गए हैं। गूगल उसकी प्रतिभा से काफी प्रभावित हुआ और सेमिनार में उसको बतौर वक्ता अपनी बात रखने का मौका दिया। साथ ही बड़े होने पर गूगल में जॉब का भी ऑफर दिया।
बोर्डगेम को बनाने के बाद समायरा को थींकटैंक लर्निंग पीचफीस्ट में दूसरा स्थान प्राप्त होने के साथ ढाई हजार डॉलर का इनाम भी मिला था। इसके साथ ही समायरा ने अपने गेम को अमेजोन पर बेचना भी शुरू कर दिया। समायरा ने एक हजार बॉक्स बेचकर 35 हजार डॉलर कमाए। समायरा के पिता राकेश मेहता, जो स्वयं सिलिकॉन वेली में इंजीनियर है, अपनी बेटी को काफी सहयोग करते हैं। समायरा के द्वारा लॉन्च किए गए गेम को अभी तक 106 स्कूल प्रयोग कर रहे हैं। राकेश मेहता का कहना है कि दुनिया में एक अरब बच्चे हैं। काफी लोग 'कोडरबुनज' गेम को स्कूलों को तोहफे में देने के लिए उत्सुक हैं। इसके साथ ही इस गेम की सफलता से उत्साहित होकर उन्होंने आर्टिफिशियल इंटलिजेंसी के लिए नया गेम लॉन्च किया है।

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