वायु प्रदूषण के कारण हो रही सबसे ज्यादा फेफड़े खराब होने की बीमारी - .

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Tuesday, 25 September 2018

वायु प्रदूषण के कारण हो रही सबसे ज्यादा फेफड़े खराब होने की बीमारी

वायु प्रदूषण के कारण हो रही सबसे ज्यादा फेफड़े खराब होने की बीमारी

फेफड़ों में जो इंफेक्शन बढ़ रहा है उसका सबसे बड़ा कारण वायु प्रदूषण व धूम्रपान है। जब हम सांस लेते हैं तो अधिक से अधिक ऑक्सीजन हमारे फेफड़ों को मिले यह जरूरी है। अगर लगातार प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं तो इनके खराब होने की संभावना अधिक होती है। बदलता माहौल व बदलती स्वास्थ्य शैली स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचा रही है। प्राणायाम व गहरी सांस लेने की तकनीक का फायदा सभी को लेना चाहिए। फेफड़ों को सुरक्षित रखने व देखरेख करने के आसान तरीकों को अपनाकर कैंसर तक से बचा जा सकता है। यह जानकारी बॉम्बे हॉस्पिटल के कंसलटेंट चेस्ट स्पेशलिस्ट डा़ॅ मिलिंद बाल्दी ने वर्कशॉप के दौरान दी।
25 सितंबर को पहली बार विश्व लंग डे मनाया जा रहा है। पूरे विश्व में प्रदूषण सहित धूम्रपान के कारण फेफड़े खराब होने वाले मरीज बढ़ रहे हैं। भारत में भी यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। भारत में दस में से नौ लोग प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं। सांस लेने की इस पूरी क्रिया में फेफड़ों का सबसे अधिक महत्व है। यह जागरूकता लाने के लिए ही वर्ल्ड लंग डे मनाया जा रहा है। हमारे फेफड़े सीधे बाहरी हवा के संपर्क में रहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार खाना पकाने, धूम्रपान के कारण भारत में 13 मिलियन लोग मर रहे हैं। इसमें महिलाओं में श्वास रोग के भी सबसे अधिक लक्षण देखे जा रहे हैं। वहीं धूम्रपान भी इसका सबसे बड़ा कारण है। भारत में धूम्रपान करने वाले लोगों में से 55.4 प्रतिशत लोग इसे कैसे छोड़े यह सोचते हैं।
25 प्रतिशत मरीज फेफड़ों के कैंसर के :- डॉ़ बाल्दी ने बताया कि पूरे भारत में जितने लोगों को कैंसर होता है उनमें से 25 प्रतिशत को फेफड़ों का कैंसर होता है। इसका सबसे बड़ा कारण धूम्रपान करना है। तंबाकू से फेफड़ों पर असर होने व इसके कारण हर पांच सेकंड में एक मौत हो रही है। वहीं धूम्रपान के कारण 4 गुना तक हार्ट अटैक, लकवा का 2 से 4 प्रतिशत व 25 प्रतिशत फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ चुका हैस जिसे कम करना हर व्यक्ति के हाथ में हैं।

फेफड़ों को स्वस्थ कैसे रखे यह बताना महत्व :- वर्ल्ड लंग डे मनाने का मुख्य उद्देश्य इनके खराब होने से होने वाली बीमारियों व इससे बचने की जानकारी देना है। एक सर्वे के अनुसार योग प्रशिक्षण के केवल 6 सप्ताह में श्वास नली की मासपेशियों की शक्ति बढ़ जाती है। गहरी सांस लेने से फेफड़े के अप्रयुक्त हिस्से का उपयोग करने में मदद मिलती है। गहरी सांस लेने से आप के फेंफड़ों की क्षमता बढ़ती है। इसी तरह की जानकारी पहुंचाना इसका महत्व है।

यह भी जाने फेफड़ों के बारे में
- हम एक दिन में 22 हजार बार सांस लेते हैं।

- 12000 लीटर गैस का आदान प्रदान होता है।
- हमारे फेफड़े पूरी जीवन नॉन स्टाप काम करते हैं।

- एक दिन में 400 लीटर कार्बन डाईऑक्साइड बाहर निकालते हैं।
- भारत में 21 प्रतिशत मौत फेफड़ों की बीमारी से होती है।

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