फिलहाल ठंडे बस्ते में जा सकते हैं प्रत्यक्ष कर सुधार, यह है कारण - .

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Monday, 24 September 2018

फिलहाल ठंडे बस्ते में जा सकते हैं प्रत्यक्ष कर सुधार, यह है कारण

फिलहाल ठंडे बस्ते में जा सकते हैं प्रत्यक्ष कर सुधार, यह है कारण

सरकार ने जीएसटी लागू कर अप्रत्यक्ष कर सुधार के लिए भले ही तत्परता दिखायी हो लेकिन प्रत्यक्ष कर सुधारों के मोर्चे पर चाल सुस्त है। केंद्र ने आयकर कानून की समीक्षा के लिए जो टास्क फोर्स बनाया था, उसने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। माना जा रहा कि आयकर सुधार की कवायद को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि आयकर कानून 1961 की समीक्षा के लिए गठित की गयी अरविंद मोदी समिति की रिपोर्ट अब तक तैयार नहीं हुई है। अभी इस पर काम चल रहा है और इसमें वक्त लग सकता है। जब समिति अपनी रिपोर्ट सौंप देगी तो उसके बाद जनता की प्रतिक्रियाएं आमंत्रित की जाएंगी। ऐसे में यह पूरी प्रक्रिया होने में काफी वक्त लग जाएगा।
सरकार ने पिछले साल 22 नवंबर को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के सदस्य (विधायी) अरविंद मोदी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया था। इसे छह माह में रिपोर्ट देनी थी लेकिन यह संभव नहीं हुआ। लिहाजा तीन माह का अतिरिक्त समय दिया गया। यह अवधि भी इस साल 22 अगस्त को पूरी हो गयी है। इसके बाद सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है कि टास्क फोर्स कब रिपोर्ट देगी लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसके सदस्यों में कई बिंदुओं को लेकर आम राय न बन पाने के कारण रिपोर्ट में विलंब हुआ है। केंद्र ने टास्क फोर्स को विभिन्न देशों में प्रचलित प्रत्यक्ष कर प्रणालियों और सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय पद्धतियों का अध्ययन कर देश की आर्थिक आवश्यकताओं के हिसाब से उपयुक्त प्रत्यक्ष कर कानून का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
उस समय माना जा रहा था कि सरकार आम चुनाव 2019 में जाने से पूर्व प्रत्यक्ष कर सुधारों का खाका तैयार करके संसद में एक विधेयक पेश कर देगी लेकिन सूत्रों का कहना है कि फिलहाल यह संभव होता नहीं दिख रहा। वैसे भी अगले साल मौजूदा सरकार के पास पूर्ण बजट नहीं है और वह सिर्फ लेखानुदान ही पेश करेगी, ऐसे में प्रत्यक्ष कर सुधार के प्रयास एक बार फिर ठंडे बस्ते में जाते दिख रहे हैं। इससे पहले भी मोदी सरकार ने आयकर कानून 1961 के प्रावधानों को सरल बनाने के लिए 2015 में दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरवी ईश्वर की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति ने जनवरी 2016 में पहली रिपोर्ट और दिसंबर 2016 में दूसरी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।
तत्कालीन यूपीए सरकार ने भी आयकर कानून 1961 को बदलने के इरादे से 2009 में 'प्रत्यक्ष कर संहिता' बनाने की दिशा में कदम उठाया था। यूपीए ने 2010 में प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक भी संसद में पेश किया लेकिन पंद्रहवीं लोक सभा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही यह विधेयक भी खत्म हो गया।

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