हबीबगंज-भोपाल स्टेशन पर यात्रियों की नींद उड़ा रहे आवारा कुत्ते - .

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Saturday, 1 September 2018

हबीबगंज-भोपाल स्टेशन पर यात्रियों की नींद उड़ा रहे आवारा कुत्ते

हबीबगंज-भोपाल स्टेशन पर यात्रियों की नींद उड़ा रहे आवारा कुत्ते

हबीबगंज व भोपाल रेलवे स्टेशन पर इन दिनों आवारा कुत्ते यात्रियों की नींद उड़ा रहे हैं। थोड़ा सा भी ध्यान हटा तो ये खाने-पीने की सामग्री से भरे बैग खींच ले जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति कुत्तों को भगाता है तो वो काटने को दौड़ पड़ते हैं। इससे यात्री काफी भयभीत हैं। स्टेशन पर कुत्तों का आतंक होने के बावजूद रेलवे व नगर निगम का इस ओर ध्यान नहीं है।
हबीबंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म-1 पर बुधवार रात 12.44 बजे कुछ ऐसा ही हुआ। सिंगरौली से रेलवे की परीक्षा देने भोपाल पहुंचे राजकरण सिंह प्लेटफार्म पर (भोपाल आउटर की तरफ) सो रहा था। सिर के नीचे बैग था, उसमें खाने-पीने की सामग्री थी। प्लेटफार्म पर आवारा घूम रहे चार कुत्ते उसके बैग तक पहुंचा गए। एक कुत्ता बैग खींचने लगा तभी राजकरण की नींद खुल गई और उसने कुत्तों को भगाया। इसके बाद भी कुत्ते नहीं भागे और उसकी तरफ टकटकी लगाए बैठे रहे। इस कारण राजकरण सो नहीं पाया। यह अकेली घटना नहीं है। दोनों ही रेलवे स्टेशनों पर आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
शहर की गलियों से स्टेशन के प्लेटफार्म तक पहुंचे कुत्ते :- इन दिनों भोपाल में दर्जनों आवारा कुत्ते हर गली-मोहल्ले में घूम रहे हैं। दर्जनों लोगों को काट चुके हैं। अब इनकी संख्या इतनी बढ़ गई है कि ये रेलवे स्टेशन जैसी भीड़भाड़ वाली जगह पर पहुंचने लगे हैं।
स्टेशनों पर पहुंचने की वजह
1- कई यात्री बचा हुआ खाना डस्टबिन में नहीं डालते और प्लेटफार्मों पर यहां-वहां फेंक देते हैं। जिसे आवारा कुत्ते खाते हैं।
2- कई यात्री ऐसे हैं, जो प्लेटफार्मों पर खाना खाते समय आवारा घूमते कुत्तों को खाना दे देते हैं। इसके कारण भी वे प्लेटफार्मों पर जमे रहते हैं।
3- डस्टबिन समय पर खाली नहीं होता। इनमें बचा हुआ खाना रहता है, जो आवारा कुत्ते खाते हैं।
आपस में झगड़ते हैं, सोने नहीं देते :- प्लेटफार्मों पर आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने पर ये आपस में भिड़ जाते हैं। शोर होता है। खासकर रात के समय ऐसा होता है। इसके कारण प्लेटफार्मों पर सोने वाले यात्रियों की नींद खुल जाती हैं। वे ठीक से सो नहीं पा रहे हैं।
कुत्तों ने परेशान किया :- मैं सो रहा था, कुत्तों ने परेशान किया। एक तो मेरा बैग खींचकर ले जाने की फिराक में था। नींद नहीं खुलती तो वह बैग लेकर भाग जाता। रेलवे को इनकी रोकथाम करनी चाहिए।

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