भाेपाल में नए बिजनेस का झांसा देकर लोन के नाम पर छह लोगाें से हड़पे 74 लाख - .

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Monday, 24 September 2018

भाेपाल में नए बिजनेस का झांसा देकर लोन के नाम पर छह लोगाें से हड़पे 74 लाख

भाेपाल में नए बिजनेस का झांसा देकर लोन के नाम पर छह लोगाें से हड़पे 74 लाख

भोपाल और उसके आसपास के छोटे व्यापारियों और फुटकर विक्रेताओं को बिजनेस के नए-नए आइडिया देकर लोन दिलाने के नाम पर आधा दर्जन लोगों से 74 लाख रुपए हड़पने का मामला सामने आया है। क्राइम ब्रांच ने मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। मास्टर मांइड के मुंबई जाने के कारण कार्रवाई में देरी हुई। जबकि उसके साथी को टीम पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी।
क्राइम ब्रांच के अनुसार अयोध्या नगर के प्रकाश नगर का 44 वर्षीय आदेश तिवारी गिरोह का मास्टर मांइड है। वह लोगों से बैंक का कर्मचारी बनकर मिलता था। जबकि उसका साथी निजामुद्दीन कॉलोनी निवासी 24 वर्षीय समीर खान को मैनेजर बनाकर मिलवाता था। आदेश कमीशन एजेंट का काम कर चुका हैं। इसलिए उसके संपर्क में काफी लोग रहते थे। वह अपने स्तर के लोगों को चुनता था। 

एमपीनगर के विजय डोंगरे ने क्राइम ब्रांच को शिकायत में बताया कि आदेश और समीर ने उससे लोन दिलाने और मकान में बैंक की शाखा खुलवाने के नाम पर रकम ले ली और न तो लोन दिया और न ही बैंक की श्ााखा खुली। क्राइम ब्रांच के पास आरोपितों द्वारा इंद्रपाल सिंह राजपूत, पुनीत जैन, लालजी पाल, राहुल पाल, शैलेन्द्र तिवारी व अवधेश सिंह से करीब 74 लाख रुपए लेकर लोन स्वीकृति का फर्जी लेटर थमाने की शिकायत पहुंची है। 
चाय की दुकान और नेट कैफे में बात करने बुलाते थे:- एएसपी रश्मि मिश्रा का कहना है कि समीर खान इंटीरियर डिजाइनर है। उसको बैंक मैंनेजर बनाकर लोगों से मिलवाया जाता था। उसके बाद बैंक के लोन शाखा का अफसर बनकर आदेश तिवारी मिलता था। पार्टी को चाय की दुकान या शानदार कैफे में बुलाकर ऑनलाइन लोन का आवेदन भरते थे। ये कम ब्याज दर लोन दिलाने का ऑफर करते थे।
लोन प्रोसेसिंग फीस एवं अन्य फीस के नाम पर समय-समय पर नकद और बैंक के खाते के माध्यम से राशि प्राप्त करते थे। लोन स्वीकृति आदेश देने के बाद जब उस व्यक्ति तक लोन की रकम नहीं पहुंचती तब ये लोग यह कहकर गुमराह करते थे कि अभी हेड ऑफिस मुंबई और दिल्ली में अधिकारी नहीं बैठ रहे हैं इसलिए वहां से आपकी राशि ट्रांसफर नहीं हो पा रही है। लंबा समय निकलने के बाद वे लापता हो जाते थे। अभी तक आरोपित बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया और विजया बैंक के कर्मचारी बनकर मिल चुके हैं।

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