इंदौर शहर को इस वजह से 19 दिनों तक झेलना होगा जल संकट - .

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Wednesday, 12 September 2018

इंदौर शहर को इस वजह से 19 दिनों तक झेलना होगा जल संकट

इंदौर शहर को इस वजह से 19 दिनों तक झेलना होगा जल संकट

शहर की जनता को अभी 19 दिन और जलसंकट से जूझना होगा। जलूद स्थित नर्मदा परियोजना में सुधार संबंधी काम जारी हैं, जिन्हें पूरा होने में 30 सितंबर तक का वक्त लगेगा। इस कारण टंकियां नहीं भरने, पानी कम आने, नहीं आने और कम दबाव से आने का सिलसिला जारी है। सामान्य दिनों में शहर को रोज करीब 410 एमएलडी पानी मिलता है लेकिन फिलहाल यह आंकड़ा 360 एमएलडी के आसपास है। नगर निगम ने 23 जुलाई से जलूद में शटडाउन कर सुधार कार्य शुरू किए थे लेकिन डेढ़ महीने से ज्यादा होने के बावजूद 30 प्रतिशत काम अधूरे हैं।
फिलहाल मानसून सीजन के कारण बोरिंग भरे हुए हैं, वरना दिक्कत काफी बढ़ गई होती। हालांकि इतना पानी मिलने के बावजूद शहर के कई इलाकों में पानी कम या नहीं बंट पा रहा है। बारिश का मौसम होने के बावजूद निगम को टैंकरों से पानी बांटना पड़ रहा है। निगम का दावा है कि शटडाउन में जो काम तय किए गए थे, उनमें से करीब 70 प्रतिशत काम पूरे हो गए हैं। बचे समय में 30 प्रतिशत काम भी पूरे हो जाएंगे। नर्मदा परियोजना (जलूद) के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर एसके कुरील ने बताया कि अभी शहर में 36 करोड़ लीटर पानी रोज आ रहा है जबकि सामान्य दिनों में करीब 42.50 करोड़ लीटर पानी आता है।
राऊ-महू में बदली जाना है लाइन :- निगम को शटडाउन के दौरान करीब 5 किमी लंबी पुरानी लाइन बदलना है। जलूद के आसपास तो ज्यादातर लाइन बदली जा चुकी है और अभी 500 मीटर लंबाई में नई लाइन डाली जा रही है। इनमें से ढाई किमी लंबी लाइन राऊ और महू की है। अभी यह काम हाथ में नहीं लिया गया है।
50 हजार लोगों के पानी की होगी बचत :-
निगम इंजीनियरों का कहना है कि अभी जलूद से इंदौर आने वाले पानी का 15 से 20 प्रतिशत लाइन लॉस, लीकेज आदि कारणों से बह जाता है। पंपों में सुधार और पुरानी लाइन बदलने से फालतू बहने वाले पानी का आंकड़ा पांच-सात एमएलडी तक सिमट सकता है। यदि निगम ने 10 एमएलडी पानी भी बचा लिया तो इतना पानी करीब 50 हजार लोगों के इस्तेमाल के लिए काफी है।
- चार पंपिंग स्टेशन पर छत बनानी है। फिलहाल एक ही संप की छत डल पाई है।
- पुराने पाइप बदलने का काम अधूरा है। शटडाउन में पांच किमी लंबी पुरानी लाइन बदली जाना है। अभी आधा काम हुआ है।
- डेढ़ महीने से ज्यादा समय में चार संप को रिपेयर करने का काम किया गया। बिजली पैनल और स्टार्टर बदले गए हैं।

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