बस में 10 में से एक यात्री को टिकट नहीं, हर माह 26 लाख की चपत - .

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Sunday, 30 September 2018

बस में 10 में से एक यात्री को टिकट नहीं, हर माह 26 लाख की चपत

बस में 10 में से एक यात्री को टिकट नहीं, हर माह 26 लाख की चपत

दोपहर 02:45 बजे का समय। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) की रूट नंबर 303 की मिडी बस। भीड़ इतनी की पांव रखने की भी जगह नहीं। जैसे ही बोर्ड ऑफिस चौराहे पहुंची चंद मिनट में ठसाठस भर गई। उमस-गर्मी और थकान के कारण लोग पसीने में भीगे हुए सफर कर रहे हैं। कुछ ही देर बाद कंडेक्टर ने सवारियों की टिकट काटना शुरू की। इस दौरान कुछ लोगों को बिना मांगे टिकट दी। लेकिन कुछ लोग बस में ऐसे भी थे, जिनसे किराया तो लिया गया, लेकिन टिकट नहीं दी गई।
पड़ताल के दौरान पाया कि बस में हर 9-10 यात्रियों में से एक को कंडक्टर टिकट नहीं दे रहा था। दरअसल, बीसीएलएल की बसों में ऐसा रोजाना होता है। कंडेक्टर मनमर्जी से काम करते हैं। टिकट देना भी उनकी मर्जी पर होता है। जो टिकट मांग लेता है, उससे विवाद की स्थिति बन जाती है। विवादों से बचने के लिए लोग भी टिकट की मांग नहीं करते। ऐसा ही इस बस में हुआ, जहां लोगों ने कंडक्टर से टिकट ही नहीं मांगी। बस में सफर करने के दौरान यात्री किराया देने के बाद टिकट लेने में लापरवाही करते हैं। जबकि, टिकट लेने का उनका अधिकार है। वहीं, बीसीएलएल के नियमों में भी बिना टिकट सफर करने में लोगों पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। इस दौरान कंडक्टर को ही दोषी माना जाता है।
भीड़ का उठाते हैं फायदा :- नवदुनिया से लोगों ने बातचीत के दौरान बताया कि जब बस में भीड़ ज्यादा होती है, तब कंडेक्टर लोगों को टिकट नहीं देते। लोग भी इस पर ध्यान नहीं देते न ही विरोध करते हैं। इसी कारण कंडेक्टर भी किराया वसूली के बाद टिकट जनरेट ही नहीं करते। यात्रियों का अनुमान है कि प्रति 10 यात्रियों में से 1 यात्री को टिकट नहीं दिया जाता।
रोज होते हैं विवाद :- टिकट नहीं देने को लेकर बस में अक्सर विवाद की स्थिति बनती है। बात गाली-गलौज, मारपीट तक पहुंच जाती है। इसमें से दो या तीन मामले ही बीसीएलएल के अधिकारियों के पास पहुंचते हैं। लोगों ने बताया कि यात्री को देखकर तय किया जाता है कि टिकट देना है या नहीं।
एक दिन में 85 हजार की चोरी:- शहर में रोज करीब 1लाख 75 हजार लोग लो-फ्लोर व मिडी बसों में सफर करते हैं। करीब 170 बसें सड़कों पर दौड़ रहीं हैं। अनुमानित तौर पर प्रति बस करीब 1030 यात्री रोजाना सफर करते हैं। इनमें से 10 में से 1 यात्री को टिकट नहीं दिया जाता। मतलब प्रतिदिन हर बस में 100 लोगों को और 170 बसों में करीब 17 हजार यात्रियों को टिकट नहीं दिया जाता। यदि कम से कम पांच रुपए भी किराया मान लिया जाए तो प्रतिदिन 85 हजार रुपए का घपला किया जा रहा है। एक माह (30 दिन) में यह आंकड़ा 25 लाख 50 हजार रुपए तक पहुंच जाता है।

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