शहरी गरीबों के लिए बनेंगे सवा लाख मकान, आठ राज्यों के प्रस्तावों को मंजूरी - .

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Monday, 27 August 2018

शहरी गरीबों के लिए बनेंगे सवा लाख मकान, आठ राज्यों के प्रस्तावों को मंजूरी

शहरी गरीबों के लिए बनेंगे सवा लाख मकान, आठ राज्यों के प्रस्तावों को मंजूरी
शहरी क्षेत्रों में आवास की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। उसका ज्यादा जोर शहरी गरीबों को मकान मुहैया कराने पर है। वर्ष 2022 तक सबको पक्का मकान देकर शहरों को संवारने की योजना है। इसी के तहत आठ राज्यों के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों के लिए लगभग सवा लाख आवासों के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। देश के शहरी क्षेत्रों में फिलहाल दो करोड़ मकान की जरूरत है। इसके अभाव में शहरों में झुग्गी बस्तियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
शहरों की सूरत संवारने के लिए झुग्गियों को हटाना होगा, जिसके लिए पक्के मकान बनाने की जरूरत है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश के शहरी क्षेत्रों में 34 फीसद इलाकों तक झुग्गियां फैली हैं। इससे निपटने के लिए मकानों की सख्त जरूरत है, लेकिन लागत में वृद्धि से इनकी कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे गरीबों के लिए मकान बनाना सपने जैसा है। मकानों की जरूरतों को देखते हुए ही राजग सरकार ने वर्ष 2022 तक सबके सिर पर छत मुहैया कराने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए सरकार की ओर से पर्याप्त वित्तीय मदद मुहैया कराई जा रही है।
शहरी विकास मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश 37,719, हरियाणा 19,858, मध्य प्रदेश 18,375, महाराष्ट्र 12, 238, छत्तीसगढ़ 10, 632, कर्नाटक 8761, जम्मू-कश्मीर 4,442 और अरुणाचल के लिए 188 आवास बनाने को मंजूरी दी है। समिति ने 55 हजार से अधिक आवास बनाने के राज्यों के मसौदे को हरी झंडी दी है। इस योजना से अलग भी सरकार ने शहरी क्षेत्रों में मकान की मांग को पूरा करने के लिए कई योजनाएं संचालित की हैं। इसमें आवासीय ऋण के ब्याज पर सरकार सब्सिडी देकर रियायत देती है। सरकार का लक्ष्य 2022 तक हर शहरी को मकान मुहैया करा देना है।

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