सस्ते फलों, सब्जियों ने थामी खुदरा महंगाई की रफ्तार - .

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Monday, 13 August 2018

सस्ते फलों, सब्जियों ने थामी खुदरा महंगाई की रफ्तार

सस्ते फलों, सब्जियों ने थामी खुदरा महंगाई की रफ्तार

फल और सब्जियों के दाम घटने से खुदरा महंगाई की दर घटकर जुलाई में महज 4.17 प्रतिशत रह गयी है। खुदरा महंगाई का यह स्तर बीते नौ महीने में न्यूनतम है। जून में खुदरा महंगाई दर 4.92 प्रतिशत थी। महंगाई के सिर उठाते देख भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार दो बार ब्याज दरें बढ़ाने का कदम उठाया। ऐसे में माना जा रहा है कि खुदरा महंगाई के बढ़ने की रफ्तार थमने से आने वाले समय में ब्याज दरों के नीचे आने की आस बंधेगी।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने सोमवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी किए। सीएसओ के अनुसार जुलाई में शहरी क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर 4.32 प्रतिशत तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 4.11 प्रतिशत रही। इस तरह महंगाई की दर गांवों की अपेक्षा शहरों में ज्यादा है। वहीं राज्यवार देखें तो खुदरा महंगाई की सबसे ज्यादा दर पश्चिम बंगाल में 7.37 प्रतिशत रही। जहां तक खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर का सवाल है तो जुलाई में यह घटकर 1.37 प्रतिशत रह गयी है जबकि जून में यह 2.91 प्रतिशत थी। खास बात यह है कि शहरी क्षेत्रों में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर -0.36 प्रतिशत रही है।
जुलाई में सब्जियों की महंगाई दर में गिरावट आयी और यह -2.19 प्रतिशत रही। इसी तह दलहन की महंगाई दर -8.91 प्रतिशत तथा शुगर और कन्फेक्शनरी की महंगाई दर -5.81 प्रतिशत रही। मीट, फिश और दूध के दाम भी जुलाई में अपेक्षाकृत कम बढ़े हैं। अंडे और फलों की महंगाई दर सात प्रतिशत के आसपास रही है। वैसे सबसे ज्यादा महंगाई हाउसिंग की 8.30 प्रतिशत और फ्यूल एंड लाइट ग्रुप की बढ़ी है। इसी तरह पान मसाला समूह की महंगाई दर भी बढ़ी है।
जुलाई में खुदरा महंगाई का स्तर बीते नौ महीने में न्यूनतम है। इससे पहले अक्टूबर 2017 में खुदरा महंगाई दर का न्यूनतम स्तर 3.58 प्रतिशत था। वैसे पिछले साल जुलाई में खुदरा महंगाई दर मात्र 2.36 प्रतिशत थी लेकिन बीते कुछ महीनों में इसमें वृद्धि हुई। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति तय करने के लिए खुदरा महंगाई को संज्ञान में लेता है। आरबीआइ ने खुदरा महंगाई दर चार फीसद (दो फीसद प्लस माइनस के साथ) पर रखने का लक्ष्य रखा है। इसलिए जब खुदरा महंगाई ऊपर जाती है तो कर्ज महंगा होने के आसार बन जाते हैं। आरबीआइ ने महंगाई को काबू करने के इरादे से लगातार दो बार रेपो दर में वृद्धि की है जिससे ऑटो और होम लोन महंगा हो गया है।

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