एक हजार साल पुराना है गैबीनाथ मंदिर - .

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Tuesday, 14 August 2018

एक हजार साल पुराना है गैबीनाथ मंदिर

एक हजार साल पुराना है गैबीनाथ मंदिर

मेडिकल कॉलेज रोड पुरवा स्थित भगवान गैबीनाथ का मंदिर का इतिहास एक हजार साल से अधिक प्राचीन है। यहां भगवान गैबीनाथ की पिण्डी का चट्टान पर उभार बहुत छोटा है लेकिन शिवलिंग का स्वरूप एकदम स्पष्ट है। यह शिवलिंग स्थापित नहीं किए गए, बल्कि प्राकृतिक रूप से चट्टान पर उभरे हैं। डॉ. बीपी अवस्थी ने बताया कि भगवान गैबीनाथ मंदिर का उल्लेख पुराणों में है। 10 वीं शताब्दी में कलचुरिकाल के दौरान भी गैबीनाथ धाम की उपासना का उल्लेख है। बाद में गोंडकाल में यहां मंदिर का निर्माण किया गया। राजा निजामशाह के समय 1765 में यहां विशाल यज्ञ कराया गया था। मंदिर परिसर में यज्ञशाला के अवशेष पिछले कुछ सालों तक मौजूद रहे।
तैयारियां :-  निकाली जाती है कांवड़ यात्रा मंदिर समिति द्वारा वर्षों पूर्व से तिलवाराघाट से गैबीनाथ मंदिर तक कांवड़ यात्रा का आयोजन सावन मास के दूसरे सोमवार को किया जाता है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर पहुंचकर सभी कांवड़िये भगवान गैबीनाथ का नर्मदा जल से जलाभिषेक करते हैं। चतुर्थ सोमवार को शाही यात्रा गैबीनाथ मंदिर की शाही सवारी यात्रा सावन के चतुर्थ सोमवार को निकाली जाती है। इस बार 20 अगस्त को मंदिर से निकलकर ब्राह्मण मुहल्ला, जोशी मुहल्ला, गढ़ा बाजार, देवताल हितकारिणी होते हुए वापस मंदिर पहुंचेगी। समिति द्वारा इसकी तैयारियां जोरों से की जा रही हैं।
गैबीनाथ मंदिर: हजार साल प्राचीन आस्था का केन्द्र  :- पिछले एक दशक के दौरान गैबीनाथ मंदिर की कायापलट हो गई है। मंदिर को नया स्वरूप दिया गया है। पुरानी ध्ार्मशाला को तोड़कर बड़ा हॉल, रंगमंच बना दिया गया है। क्षेत्रीय युवाओं की सहभागिता से महाआरती के अलावा विविध आयोजन भी होने लगे हैं।भगवान गैबीनाथ के जलाभिषेक का महत्व भगवान के जलाभिषेक का बड़ा महत्व है। बताया जाता है कि गोंड राजा नरहरिशाह जब भी गढ़ा में रहते थे, तब भगवान गैबीनाथ का नर्मदा जल से अभिषेक करते थे। भगवान गैबीनाथ का जलाभिषेक न केवल श्रावण मास बल्कि बारहों महीने किए जाने का महत्व है। ऐसे कई श्रद्धालु हैं, जो भगवान का प्रतिदिन जलाभिषेक करते हैं।

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