खादी की ब्रांडिंग के लिए भोपाल आईं थीं कस्तूरबा गांधी - .

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Wednesday, 15 August 2018

खादी की ब्रांडिंग के लिए भोपाल आईं थीं कस्तूरबा गांधी

खादी की ब्रांडिंग के लिए भोपाल आईं थीं कस्तूरबा गांधी

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के साथ उनकी धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी ने भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। आंदोलन में भाग लेने के कारण वह 6-7 बार जेल भी गईं। 1944 में उनकी मृत्यु आगा खान जेल में ही हुई थी। तीस के दशक (1930-1939) में खादी की ब्रांडिंग के लिए गांधीजी के साथ 'बा' मप्र के भोपाल भी आईं थीं। उन्होंने भोपाल स्टेट के तत्कालीन शासक से खादी अपनाने का आग्रह भी किया था। कस्तूरबा गांधी को लेकर ऐसे कई तथ्य उनके जीवन पर हुए शोध में सामने आए हैं।
गांधीजी से जुड़ी ज्यादातर बातें देशवासियों के सामने आ चुकी हैं, लेकिन 'बा' यानी कस्तूरबा गांधी के मामले में ऐसा नहीं हो पाया। इस शोध में बताया गया है कि तीस के दशक में उन्होंने अपनी भोपाल यात्रा के दौरान यहां के तत्कालीन शासक नवाब हमीदुल्ला खां से चर्चा में उन्हें खादीको बढ़ावा देने का आग्रह भी किया था। गांधीजी एवं 'बा' की 150वीं जयंती समारोह के लिए चल रही देशव्यापी तैयारियों के दौरान यह बात केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा गठित समितियों के सामने भी आई है।
कस्तूरबा गांधी के जीवन पर बन रही फिल्म आयकर विभाग के प्रधान निदेशक आरके पालीवाल ने 'बा' के जीवन पर लंबे शोध के बाद वर्ष 2011 में एक चर्चित नाटक भी लिखा, जिसका मंचन मुंबई, दिल्ली, भोपाल, पटियाला और इंदौर में हो चुका है। राष्ट्रीय नाट्‌य संस्थान (एनएसडी) के कलाकार इसकी प्रस्तुति दे चुके हैं। नाटक को केन्द्र में रखकर गांधी भवन भोपाल ने 'हमारी बा कस्तूरबा' फिल्म का निर्माण भी शुरू किया है। इस साल गांधी जयंती तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। फिल्म में 'बा' की भूमिका एनएसडी की कलाकार प्रीति तिवारी निभाएंगी। फिल्म की टीम इसके लिए आगा खां पैलेस, पोरबंदर और साबरमती आश्रम सहित भोपाल की कई लोकेशन का दौरा कर चुकी है।
उन्हें पढ़ाते थे गांधीजी :- वरिष्ठ आयकर अधिकारी पालीवाल बताते हैं कि 'बा' के बारे में कई तथ्य ऐसे हैं जिनके बारे में कम लोगों को जानकारी है। मसलन वह गांधीजी से उम्र में छह माह बड़ीथीं। शिक्षा की दृष्टि से देखें तो गांधीजी बैरिस्टर थे, लेकिन 'बा' की औपचारिक स्कूली शिक्षा बिल्कुल नहीं हुई थी। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रहकर अंग्रेजी-हिन्दी सीखी और मंच पर भाषण भी करने लगीं। उन्हें गांधीजी पढ़ाते भी थे। गांधीजी के सभी आश्रमों के प्रबंधन का दायित्व उनके पास ही था। अपने नाटक पर फिल्म बनने को लेकर पालीवाल कहते हैं कि 'यह सम्मान और प्रसन्नाता का विषय है कि मेरे साहित्यिक अवदान पर फिल्म बन रही है। इससे 'बा' के व्यक्तित्व से जुड़ी कई जानकारियां लोगों तक पहुंचेंगी

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