अटलजी के निधन से एक राजनीतिक युग का अंत हो गया : शिवराज - .

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Thursday, 16 August 2018

अटलजी के निधन से एक राजनीतिक युग का अंत हो गया : शिवराज

अटलजी के निधन से एक राजनीतिक युग का अंत हो गया : शिवराज

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हमारे सिर से पितृतुल्य ऐसे व्यक्तित्व का साया उठ गया, जिसने हमेशा चुनौतियों से लड़ने का साहस दिया, नई राह दिखाई। आज एक राजनीतिक युग का अंत हो गया। सीएम ने कहा कि मैं परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। हम सब के लिए ये दुखदायी क्षण है। शिवराज ने कहा कि जिनके शब्द हमारी शक्ति हैं, आशीर्वाद हमारी ऊर्जा, जिनकी प्रेरणा हमें देश सेवा के लिए समर्पित करें, ऐसे आदरणीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के चरणों में बारंबार प्रणाम। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का स्वास्थ्य खराब होने के बाद एम्स में इलाज चल रहा था। इस दौरान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार की अपनी जनआशीर्वाद यात्रा को स्थगित कर दिया। मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि अटलजी की उपस्थिति मात्र से हमको हौसला मिलता था।अटलजी की कविताओं से सभी को प्रेरणा मिलती है। स्वतंत्रता दिवस पर उनकी कविता का उल्लेख किया था। सीएम शिवराज ने कहा कि विदिशा से चुनाव लड़ने के दौरान मैं उनके करीब आया था। जब भी उनसे मिलता था तो वे मुझे विदिशापति कहते थे।
अपनी श्रद्धांजलि में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने कहा कि देश में ही नहीं, दुनिया में अटलजी की पहचान कुशल राजनीतिज्ञ, दक्ष प्रशासक, प्रखर वक्ता के रूप में होती थी। उनके निधन से बड़ा शून्य उत्पन्न् हुआ है।
सर्वमान्य नेता थे अटलजी
वे दलीय राजनीति से ऊपर उठकर देश के सर्वमान्य नेता थे। उनका सभी दलों के नेता दिल से सम्मान करते थे। उनकी उपस्थिति हम जैसे अनेक लोग जो राजनीति और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं का मार्गदर्शन करती थी। अटलजी सदैव हमारे परिवार का एक हिस्सा रहे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता विक्रम वर्मा ने बताया कि 'जब मुझे मप्र का नेता प्रतिपक्ष बनाया गया तो मैं अटलजी का आशीर्वाद लेने गया। उन्होंने मुझसे कहा कि नेता प्रतिपक्ष का कर्तव्य है कि वह नीतिगत मुद्दों पर सरकार का विरोध करे और जरूरत पड़ने पर प्रदेश की जनता के हित में सरकार के साथ भी खड़ा हो। अटलजी ने मुझसे कहा था कि हम नफरत पैदा न करें। नेता प्रतिपक्ष का काम विरोध करना है। राजनीति में व्यक्तिगत संबंधों और मर्यादा का ख्याल रखें।"
जिह्वा पर मां सरस्वती विराजमान थीं :- अटलजी का निधन भारतीय राजनीति के लिए गहरी क्षति है। आज भारत ने एक सच्चा सपूत खो दिया। उनका व्यक्तित्व ऐसा था, जिनका सभी लोग सम्मान करते थे। पं. नेहरू से लेकर सोनिया गांधी तक अटलजी का बहुत सम्मान करते थे। उनकी जिह्वा पर मां सरस्वती विराजमान थीं। भाषण शैली इतनी सुंदर हुआ करती थी कि कटु से कटु आलोचना करते हुए भी वे किसी को अपमानित नहीं करते थे। मुझ पर उनकी विशेष कृपा रही। यह देश का दुर्भाग्य है कि जब देश को उनकी सबसे ज्यादा आवश्यकता रही, तब उनकी तबीयत ठीक नहीं रही। उन्होंने हमेशा राजधर्म का पालन किया और राजधर्म का पालन करने की सीख दी, वे सही मायने में जननेता थे।

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