नक्सलियों के जोनल कमेटी में महिला कमांडरों का दबदबा - .

Breaking

Saturday, 4 August 2018

नक्सलियों के जोनल कमेटी में महिला कमांडरों का दबदबा

नक्सलियों के जोनल कमेटी में महिला कमांडरों का दबदबा

बस्तर, ओडिशा, आंध्र व महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों को मिलाकर नक्सलियों द्वारा गठित दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेसी) में महिला कैडर्स का दबदबा है। नक्सलियों के इस रेड कॉरीडोर में सक्रिय दर्जनभर महिला कैडर्स पर सरकार ने तीन से 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। इन महिला छापामारों में अधिकतर शीर्ष नक्सल नेताओं की पत्नियां हैं।
नक्सली नेता रणनीति के तहत किशोरावस्था में ही स्थानीय लड़कियों की भर्ती करते हैं। इन्हें क्रमशः चेतना नाट्य मंडली (सीएनएम), क्रांतिकारी आदिवासी महिला संगठन (केएएमएस) में शामिल कर कथित लाल क्रांति की घुट्टी पिलाने के बाद लोकल ऑपरेशन स्क्वॉएड (एलओएस) व लोकल गुरिल्ला स्क्वॉएड (एलजीएस) में जिम्मेदारी दी जाती है।
इसके बाद धीरे-धीरे उनमें सैन्य क्षमता विकसित होने के उपरांत एरिया कमेटी, जोनल कमेटी समेत सैन्य इकाइयों की कमान सौंपी जाती है। जोनल में महिला लड़ाकुओं का प्रभुत्व है लेकिन नक्सलियों के कंपनी व प्लाटून में महिलाओं की संख्या सिमटती जा रही है। इसके पीछे बीते वर्षों में नई भर्तियों में आई कमी व दो वर्षों में हुई मुठभेड़ों में 21 महत्वपूर्ण महिला छापामारों का मारा जाना अहम कारण बताया जाता है।
ये हैं हार्डकोर महिला नक्सली :- सजवंती, माडवी मंगली, वनीता, रीता उर्फ रीता, रोजा व ओयाम सनवति हार्डकोर महिला नक्सली हैं, जिनकी पुलिस को तलाश है।
हेडक्वार्टर डिवीजन की कमान गणपति की पत्नी को :- जोनल कमेटी में नक्सल संगठन के शीर्ष नेता गणपति की पत्नी अल्लूरी कृष्णा उर्फ रत्ना बाई जोनल के छह एरिया कमेटियों में सबसे अहम और हेडक्वार्टर माने जाने वाले माड़ डिवीजन की प्रभारी है। इस पर शासन ने सर्वाधिक 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। इसके अलावा सीसी मेंबर रहे दिवंगत नेता किशनजी की पत्नी पद्मा उर्फ कल्पना उर्फ सुजात-ा पर भी 25 लाख का इनाम है। इसे दक्षिण बस्तर डिवीजन में सेकंड इंचार्ज की जिम्मेदारी दी गई है। इन दोनों महिला छापामारों के अलावा नीचे कैडर की अन्य प्रमुख नेत्रियां भी आंध्र व बस्तर से बाहर की बताई गई हैं।
बीजापुर की आदिवासी कमांडर चार भाषाओं में दक्ष :- सीसी कमेटी के ओहदेदारों की दो पत्नियों के अलावा तीसरे दर्जे की प्रमुख महिला नक्सली पूर्वी बस्तर डिवीजन प्रभारी नीति उर्फ उर्मिला बताई जाती है। यह डिवीजन की प्रवक्ता के रूप में भी सक्रिय है। इस पर 10 लाख रुपये का इनाम है। बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के वन्यग्राम एरमागुंडा में जन्मी 25 वर्षीया नीति गोंडी, हिंदी, तेलगु व मराठी धाराप्रवाह बोलती है। वर्ष 2011 में इसने स्वामी अग्निवेश की मध्यस्थता में चार अपहृत आरक्षकों को रिहा कराने में अहम भूमिका निभाई थी।
कृष्णा व पद्मा का संगठन में अहम दर्जा होने से उन्हें डबल लेयर सिक्यूरिटी में रखा जाता है। दोनों महिलाओं को एके-47 व एसएलआर जैसे स्वचालित हथियारों से लैस दो दर्जन नक्सली सुरक्षा घेरा देते हैं। यह भी बताया जाता है कि बस्तर से बाहर आंध्र, महाराष्ट्र व ओडिशा की सीमाओं पर जाने पर उन्हें वहां की लोकल मिलिट्री कमीशन (एलएमसी) के सदस्यों द्वारा सुरक्षा दी जाती है। यह खुद भी फारेन मेड 9 एमएम पिस्टल से लैस रहती हैं। इन दोनों महिलाओं पर कई राज्यों की पुलिस व खुफिया एजेंसियों की निगाहें वर्षों से लगी हैं। कई बड़ी घटनाओं में इन्होंने लीड किया है।
अन्य संगठनों में सक्रिय महिलाएं व इनाम :- मलांगीर एरिया प्रबारी मंजुला उर्फ पेद्दी आठ लाख, प्रभारी कोंटा एरिया कमेटी वेट्टी कन्नी आठ लाख, प्रभारी इंद्रावती एरिया कमेटी सपना आठ लाख व प्रभारी कोरर एरिया कमेटी राजे उर्फ मालती आठ लाख।

No comments:

Post a Comment

Pages