मंदसौर में शाही पालकी में सवार हुए भगवान पशुपतिनाथ - .

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Monday, 13 August 2018

मंदसौर में शाही पालकी में सवार हुए भगवान पशुपतिनाथ

मंदसौर में शाही पालकी में सवार हुए भगवान पशुपतिनाथ

श्रावण मास के तीसरे सोमवार को अष्टमुखी भगवान श्री पशुपतिनाथ महादेव को भक्तों ने शाही पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण कराया। अष्टधातु से निर्मित भगवान श्री पशुपतिनाथ की मूर्ति के पूजन व अभिषेक के पश्चात सुबह 11.45 बजे यात्रा प्रारंभ हुई। पालकी में विराजे भगवान के दो मुखों पर अर्द्धनारीश्वर श्रृंगार व शेष अन्य मुखों का भी अलग-अलग श्रृंगार किया गया था। पालकी को भक्तों ने कांधों पर उठाकर भगवान आशुतोष को पूरे शहर में भ्रमण करवाया। लगभग 8 घंटे में करीब 9 किमी की यात्रा तयकर 7.30 बजे बाद शाही पालकी वापस पशुपतिनाथ मंदिर पहुंची।
श्री पशुपतिनाथ शयनकालीन आरती युवा मंडल द्वारा लगातार सातवें वर्ष श्रावण के तीसरे सोमवार को शहर में भगवान पशुपतिनाथ की शाही पालकी निकाली गई। महादेव के जयकारे लगाते हुए भक्तों ने पालकी कंधे पर उठाकर नगर भ्रमण प्रारंभ किया। तापेश्वर महादेव की झांकी भी शामिल थी। पालकी में उज्जैन के नगाड़े, शिव दरबार की झांकी, कालकामाता एवं भारतमाता की झांकी, भूतों की टोली, उज्जैन के साधु-संतों की टोली, नासिक के ढोल, डीजे भी शामिल थे। महिलाओं ने कलश धारण किए थे। युवतियां गरबा नृत्य करती रहीं। सबसे पीछे भक्तों के कंधों पर भगवान पशुपतिनाथ की शाही पालकी चल रही थी।
इस दौरान भक्तों की टोलियां डीजे, ढोल व ताशे पर नृत्य करते हुए जयकारे लगाते चल रही थीं। झांकियों में कलाकार शिव तांडव एवं शिव भक्ति नृत्य कर रहे थे। शाही पालकी पशपुतिनाथ नवीन पुलिया, धानमंडी, बड़ा चौक, गणपति चौक, शुक्ला चौक, नयापुरा रोड, आरके हॉस्पिटल, गोल चौराहा, बीपीएल चौराहा, गांधी चौराहा, बस स्टैंड, घंटाघर, मंडी गेट होते हुए शाम लगभग 7.30 बजे पुन: मंदिर पर पहुंची। मार्ग में अनेक स्थानों पर शाही पालकी का स्वागत हुआ। वहीं पशुपतिनाथ मंदिर पर भी दिनभर भक्तों की भीड़ रही। सुबह से रात तक 60 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन किए।

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