अटल जी नहीं रहे, शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे निकाली जाएगी अंतिम यात्रा - .

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Thursday, 16 August 2018

अटल जी नहीं रहे, शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे निकाली जाएगी अंतिम यात्रा

अटल जी नहीं रहे, शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे निकाली जाएगी अंतिम यात्रा

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया है। वह 93 साल के थे। गुरुवार शाम 5 बजकर 5 मिनट पर उन्‍होंने आखिरी सांस ली। एम्‍स से एंबुलेंस में अटल जी के पार्थिव शरीर को उनके निवास पर लाया जा चुका है। रात साढ़े नौ बजे से अटल जी के निवास पर उनके पार्थिव शरीर के दर्शन शुरू किए जाएंगे। इस जगह को सजाया जा रहा है। अंतिम विदाई की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। उनके अंतिम दर्शन के लिए राजनीतिक हस्तियों का तांता लग गया है। अटल जी का पार्थिव शरीर उनके निवास पर लाया जा चुका है। यहां थल सेना, जल सेना और वायु सेना के प्रमुखों द्वारा उन्‍हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। इस स्‍थान पर उनके शव को तिरंगे में लपेट कर रखा गया है।
शुक्रवार सुबह 9 बजे से उनके पार्थिव शरीर को भाजपा मुख्‍यालय पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। यहां दोपहर 1 बजे तक अंतिम दर्शन होंगे। इसके बाद दोपहर डेढ़ बजे से उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। शाम चार बजे अटल जी का अंतिम संस्‍कार किया जाएगा। उनके राजनीतिक साथी रहे एलके आडवाणी भी निवास पर पहुंच चुके हैं। दिल्‍ली सरकार ने शुक्रवार को अवकाश का ऐलान किया है, वहीं उत्‍तरप्रदेश में सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। मध्‍यप्रदेश और झारखंड में भी शुक्रवार को अवकाश रहेगा।बिहार सरकार ने भी अटल जी के निधन पर शुक्रवार का अवकाश एवं सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। उत्‍तराखंड सरकार ने भी शुक्रवार को अवकाश घोषित करते हुए सात दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया है।
अटल जी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वाजपेयी को सांस लेने में परेशानी, यूरीन व किडनी में संक्रमण होने के कारण 11 जून को एम्स में भर्ती किया गया था। 15 अगस्‍त को उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्‍हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया।वाजपेयी काफी दिनों से बीमार थे और वह करीब 15 साल पहले राजनीति से संन्यास ले चुके थे। अटल बिहारी वाजपेयी ने लाल कृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर भाजपा की स्थापना की थी और उसे सत्ता के शिखर पहुंचाया। भारतीय राजनीति में अटल-आडवाणी की जोड़ी सुपरहिट साबित हुई।
अटल बिहारी देश के उन चुनिन्दा राजनेताओं में से एक थे, जिन्हें दूरदर्शी माना जाता था। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में ऐसे कई फैसले लिए जिसने देश और उनके खुद के राजनीतिक छवि को काफी मजबूती दी।

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