बालक का अपहरण कर अप्राकृतिक कृत्य और हत्या पर चार माह में सुनाई मौत की सजा - .

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Monday, 13 August 2018

बालक का अपहरण कर अप्राकृतिक कृत्य और हत्या पर चार माह में सुनाई मौत की सजा

बालक का अपहरण कर अप्राकृतिक कृत्य और हत्या पर चार माह में सुनाई मौत की सजा

विशेष न्यायालय दतिया(पॉक्सो अधिनियम) के न्यायाधीश हितेंद्र द्विवेदी ने चार माह पूर्व एक नाबालिग का अपहरण कर उसके साथ अप्राकृतिक कृत्य कर हत्या के मामले में आरोपी पर आरोप सिद्ध होने पर मृत्यु दंड देते हुए 85 हजार रुपए का अर्थदंड दिया है। उक्त मामले की कार्रवाई 4 माह में पूरी कर ली गई है।
गौरतलब है कि उक्त मामले में आरोपी नंद किशोर व एक अन्य साथी ने बीते मार्च माह की दो तारीख को मृत बालक को अबीर देने के बहाने मोटरसाइकिल पर बिठाया व अपने साथ ले गए। इसके बाद इन लोगों ने बच्चे को एक कमरे में बंद कर दिया। काफी समय पर बालक के न मिलने पर उसके परिजनों ने बालक की गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में कर दी। इसके बाद पुलिस जांच कर ही रही थी। तभी अारोपितों ने बालक के पिता से एक लाख रुपए की मांग की। इसके बाद जब बालक की तलाश शुरू की गई तो अगले दिन यानी तीन मार्च को बालक के घर के निकट लगे सीसीटीवी कैमरे में खंगाला गया। जिसमें आरोपी एक अन्य किशोर बालक के साथ मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर जाते हुए देखा गया। जिसकी सूचना आरोपितों तक भी पहुंच गयी। पकड़े जाने के भय से आरोपियों ने भागने का प्रयास किया।
इसी दौरान अरोपियों को इंदरगढ़ बस स्टैंड से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उन्होंने यह तो कबूल किया कि उन्होंने ही बच्चे को मारकर उसकी लाश को नहर में फेंक दिया था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सम्पूर्ण साक्ष्य एकत्रित किए। जिसके बाद आरोपी के विस्र्द्ध 2 मई को दतिया के विशेष न्यायालय में अभियोग प्रस्तुत किया गया। मामले में कराई गई डीएनए रिपोर्ट भी सात अगस्त को प्रस्तुत की गई। डीएनए रिपोर्ट व अन्य साक्षों के आधार पर सोमवार को कोर्ट ने अरोपी नंद किशोर के खिलाफ मौत की सजा का निर्णय पारित किया। 
अन्य आरोपी के खिलाफ चलेगा ट्रायल :- अन्य आरोपी बालक की आयु 16 वर्ष से अधिक होने व उसके द्वारा जघन्य अपराध कारित करने के आधार पर निरीक्षक बायएस तोमर द्वारा किशोर न्यायबोर्ड के समक्ष बीते दो मई को ही बालक के विस्र्द्ध प्रकरण में विचारण कार्रवाई करने के लिए प्रकरण बालक न्यायालय जिला दतिया में भेजने के लिए आवेदन दिया गया था। अभियोजन की और से प्रस्तुत आवेदन किशोर न्याय बोर्ड द्वारा स्वीकार कर प्रकरण निराकरण के लिए बाल न्यायालय दतिया को भेजा जाएगा। बाल न्यायलय की हैसियत से बालक के विस्र्द्ध भी अपराध का विचारण सत्र प्रकरण के समान विशेष न्यायधीश हितेंद्र द्विवेदी द्वारा किया जाएगा।

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