चार जातियों तक ही ओबीसी आरक्षण का लाभ - .

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Sunday, 12 August 2018

चार जातियों तक ही ओबीसी आरक्षण का लाभ

चार जातियों तक ही ओबीसी आरक्षण का लाभ
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने के बाद सरकार का अगला कदम विकास की दौड़ में पिछड़ी रह गई ओबीसी जातियों को आगे बढ़ाने का है। सरकार को ओबीसी की पिछड़ी रह गईं ऐसी जातियों का पता लगाने के लिए आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने में भी अब कुछ और समय लगने की संभावना है। हालांकि इस बीच आयोग के पास चौंकाने वाली जानकारी आई है। इसके मुताबिक ओबीसी को मिले 27 फीसद आरक्षण में से 20 फीसद से ज्यादा का लाभ सिर्फ तीन-चार ओबीसी जातियों तक ही सीमित रहा है। लिहाजा, सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग का लाभ के आधार पर वर्गीकरण करने पर विचार कर रही है।
ओबीसी आरक्षण को लेकर यह स्थिति तब है, जब केंद्रीय सूची में मौजूदा समय में 2479 ओबीसी जातियां शामिल हैं। ऐसे में आरक्षण के लाभ से ओबीसी के एक बड़े वर्ग का वंचित रहना चौंकाने वाला है। हालांकि आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अभी इसका निचले स्तर तक अध्ययन कराया जा रहा है। आयोग ने इस दौरान जो आधार बनाया है, उनमें ओबीसी जातियों के शैक्षणिक, सरकारी नौकरी और पंचायत स्तर पर मिलने वाले प्रतिनिधित्व को शामिल किया है। इसके अलावा छात्रवृत्ति आदि में भी इनके मिलने वाले लाभों को वर्गीकृत किया है।
सरकार की कोशिश है कि आरक्षण के बावजूद इसके लाभ से वंचित रह गई जातियों को ज्यादा लाभ देकर उन्हें आगे बढ़ाया जाए। इसके तहत ओबीसी आरक्षण का वर्गीकरण करने की तैयारी है। सरकार के लिए वैसे भी यह आसान होगा, क्योंकि कई राज्य पहले से ही ओबीसी आरक्षण का वर्गीकरण कर चुके हैं। माना जा रहा है कि सरकार को इसका लाभ चुनाव के दौरान मिल सकता है, क्योंकि आरक्षण के बाद भी लाभ से वंचित ओबीसी का एक बड़ा समूह इस बदलाव के बाद फायदे में आ जाएगा। गौरतलब है कि सरकार ने ओबीसी के वर्गीकरण को लेकर गठित जस्टिस जी. रोहणी के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया है, जिसका कार्यकाल इसके बढ़ते कामकाज को देखते हुए हाल ही में बढ़ाकर नवंबर 2018 तक कर दिया गया है।
इन राज्यों में हो चुका वर्गीकरण :- ओबीसी आरक्षण का वर्गीकरण देश के कई राज्यों में पहले से ही किया जा चुका है। हालांकि यह वर्गीकरण राज्य सूची के आधार पर किया गया है। जिन राज्यों में यह वर्गीकरण किया गया है, उनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, झारखंड, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी आदि हैं।
आवाज उठाने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी :- ओबीसी को मिलने वाले आरक्षण के वर्गीकरण के खिलाफ आवाज उठा रहे राजनीतिक दलों को सरकार इस बीच मुंहतोड़ जवाब देने की भी तैयारी में है। इसके लिए मंडल आयोग की ओर उन सारी टिप्पणियों को तलाशा जा रहा है, जिसे आयोग ने आरक्षण लागू होने के बाद निगरानी रखने के लिए कहा था, लेकिन सालों तक इसकी किसी ने सुध नहीं ली। इसके चलते आरक्षण के लाभ से एक बड़ा तबका अभी भी वंचित है। इसके अलावा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी वर्ष 2011 में ही इसके वर्गीकरण की सिफारिश की थी। खास बात यह है कि मंडल आयोग ने भी आरक्षण की सिफारिश करते समय इस बात की आशंका जताई थी कि कहीं ऐसा न हो कि इनमें शामिल कुछ मजबूत जातियां ही सब के हिस्से का लाभ हड़प लें। यानी वह ओबीसी में सारी मलाई खाने वाली "क्रीमीलेयर" न बन जाएं।

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