हर साल 60 से अधिक मरीजों का पुनर्वास कर रही अस्पताल की बर्न यूनिट - .

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Wednesday, 15 August 2018

हर साल 60 से अधिक मरीजों का पुनर्वास कर रही अस्पताल की बर्न यूनिट

हर साल 60 से अधिक मरीजों का पुनर्वास कर रही अस्पताल की बर्न यूनिट

राधा पवार, 40, सात साल पहले ससुराल वालों ने जला कर मारने का प्रयास किया। 50 फीसदी जली स्थिति में चोइथराम अस्पताल बर्न यूनिट में भर्ती किया गया। ठीक होने पर डिप्रेशन में चली गईं। लगातार काउंसलिंग की गई। स्किन ट्रांसप्लांट की गई। अस्पताल में नौकरी दी और दो बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाया। आज नगर निगम की कचरा वाहन में ड्राइवर के रूप में काम कर रही हैं।
इसी तरह शबाना को तीन साल पहले ससुराल वालों ने केरोसिन डालकर जला दिया। स्किन ट्रांसप्लांट की गई साथ ही लगातार काउंसलिंग कर उसे इस स्थिति में लाया गया कि वो अपना जीवन चला सके और बच्ची को पाल सके।यह भी पढ़ें

ऐसे ही हर साल 60 से अधिक बर्न इंजुरी के मरीजों का पुनर्वास (रिहेबिलिटेट) करने का काम चोइथराम अस्पताल की बर्न यूनिट द्वारा किया जा रहा है। 38 साल पहले डॉ. शोभा चेमानी द्वारा शुरू की गई यह प्रदेश की एकमात्र यूनिट है जहां मरीजों को इलाज के बाद रिहेबिलिटेट भी किया जाता है। इसके तहत उन्हे काउंसलिंग प्रदान करने के साथ आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के प्रयास भी किए जाते हैं। डॉ. चेमानी कहती हैं जले हुए मरीजों के लिए आगे का जीवन आसान नहीं होता इसकी बड़ी वजह समाज में ऐसे लोगों को स्वीकार करने की प्रवृत्ति कम होना है।
ऐसे लोगों का सिर्फ अस्पताल से इलाज कर देना ही काफी नहीं होता बल्कि उन्हे सामाजिक, मानसिक, आर्थिक रूप से सहयोग की आवश्यकता होती है। डॉ. चेमानी कहती हैं डॉक्टर मरीज का इलाज कर देने तक ही अपनी जिम्मेदारी समझते हैं जबकि उनका काम इसके आगे भी होता है। मरीज को मानसिक रूप से बीमारी से बाहर निकालना जरूरी होता है। हम इन्हें लायक बनाते हैं कि ये जीवन खुद चला सकें। चोइथराम अस्पताल में 1980 में स्थापित बर्न यूनिट से हजारों महिलाओं को रिहेबिलिटेट किया जा चुका है।यह भी पढ़ें

आज दूध का बिजनेस कर 10 हजार रुपए महीना कमा रही :- बेटमा की अनीता चौहान (32) ने पति की शराब पीकर पिटाई करने की आदत से परेशान होकर मारने की वजह से खुद को जलाकर आत्महत्या की कोशिश की। 35 फीसदी जलने के कारण उसे अस्पताल में भर्ती किया गया। इलाज के बीच में पति छोड़ गया। काउंसलिंग के बाद उसने घर में जो गाय थी उसका दूध बेचना शुरू किया। जिससे 5000 रुपए की आमदनी होती थी। अस्पताल ने उसे एक और गाय खरीदवाई और आज वह 10 हजार रुपए प्रतिमाह कमा रही है।

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