बिरजू महाराज का 40 साल तक पीछा किया कमल हासन ने - .

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Tuesday, 7 August 2018

बिरजू महाराज का 40 साल तक पीछा किया कमल हासन ने

बिरजू महाराज का 40 साल तक पीछा किया कमल हासन ने

कमल हासन, अभिनय तो करते ही हैं, निर्देशक हैं, गाने कंपोज़ करते हैं, उन्हें लिखते हैं और साथ ही उन्होंने कई क्लासिकल डांस फॉर्म्स में महारथ भी हासिल कर रखी है। अपनी कई फिल्मों में उन्होंने भरतनाटयम भी परफॉर्म किया है।
कमल बताते हैं ''मेरे घर में कला का माहौल रहा है। मेरी बहनें बहुत अच्छी डांस टीचर थीं, मैं उन्हें डांस करते हुए देखता था। जब वे शादी करके चली गईं तो मैं डांस को बहुत मिस करने लगा। मैंने डांस सीखने का फैसला किया। मैंने कथक सीखा, फिर कुचीपुड़ी, भरतनाट्यम भी सीखा।''
कमल कहते हैं कि मेरी हमेशा से ख्वाहिश थी कि उदय शंकर साहब और पंडित बिरजू महाराज का शार्गिद बन कर उनसे शिक्षा प्राप्त कर लूं लेकिन वो हो नहीं पाया। उन्होंने बताया ''40 साल पहले मैंने विशाखापट्नम में बिरजू महाराज का परफॉरमेंस देखा था और उस वक्त लगा कि मेरी किस्मत में क्यों नहीं इनसे सीखना लिखा है, विश्वरूपम में जब मौका मिला तो मैं उन तक पहुंच गया। मैंने उनसे कुछ महीने की ट्रेनिंग ली। मैं हैरान हूं कि तुमने इतनी जल्दी कैसे मेरी स्टाइल को पकड़ लिया है क्योंकि इसे पकड़ने में कई साल लग जाते हैं। मैंने कहा सर सालों ही लगे हैं, आपकी स्टाइल पकड़ने में। मैंने 40 साल और ये तीन महीने दिये हैं। तीन महीने आपका हाथ मेरे सिर पर था, पर 40 साल से आप मेरे सिर पर थे, मतलब मुझे इस कदर आपका नशा था। आप जैसा डांस करने की कोशिश मैं कई सालों से कर रहा हूं।''
कमल आगे बताते हैं कि उनके घर में हमेशा कला को महत्व दिया जाता रहा है। वह कहते हैं ''मैं आज जो कुछ भी हूं उसी माहौल की वजह से हूं। मेरे पिता एक वकील थे। वह शुरुआत के दिनों में अमीर नहीं थे। उन्होंने खुद को काबिल बनाया अपनी शिक्षा के माध्यम से। उन्हें जो कुछ भी नहीं मिला था, वो अपने बच्चों को देना चाहते थे। कला और शिक्षा देना चाहते थे।''
कमल बताते हैं कि वह खुद आर्टिस्ट नहीं थे, लेकिन कला को बहुत पसंद करते थे। यही वजह है कि मेरे गांव परोपड़ी में उन्होंने घर के पास एक बड़ा सा प्लॉट बनाया था और आधा प्लॉट एक ओपन थिएटर की तरह था। अगर कोई शो नहीं होता था तो मेरा भाई उसमें क्रिकेट खेलता था। हर साल दो से तीन महीने लगातार वहां कला से जुड़े परफॉर्मेंस हुआ करते थे। वो थिएटर का नाम मेरी छोटी बहन के नाम पर था। मेरे पिता चाहते थे कि वो आर्टिस्ट बने। मेरे गांव में कोई दूसरा और कला को इतना प्रोमोट नहीं करता था, जितने मेरे पिता करते थे। यही वजह है कि हमने हर तरह की कला को जिंदगी में सम्मान दिया और मैं आज इस बात को गर्व से कहता हूं मैं एक कलाकार हूं। कमल हासन की फिल्म 'विश्वरूपम 2' इसी 10 अगस्त को रिलीज़ होने वाली है।

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