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Saturday, 11 August 2018

हॉस्टल संचालक को लग गई थी भनक, 15 दिन पहले ही खाली कर गया था घर

भोपाल : हॉस्टल संचालक को लग गई थी भनक, 15 दिन पहले ही खाली कर गया था घर


राजधानी के अवधपुरी स्थित क्रिस्टल आईडल कॉलोनी के कवर्ड कैंपस में अश्विनी शर्मा मूक-बधिरों का हॉस्टल चलाता है। उसे मूक-बधिर छात्रा से अश्लील छेड़छाड़ किए जाने कि शिकायत होने की भनक पहले ही लग गई थी। लिहाजा, उसने 15 से 20 दिन पहले ही यह बिल्डिंग खाली कर दी थी। इस बिल्डिंग के सामने एक कार भी खड़ी है, जिसके बारे में कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है। इतना ही नहीं इस कवर्ड कैंपस में एक और डुप्लेक्स में भी कुछ मूक-बधिरों को रखा गया था, जिसे एक माह पहले ही खाली कर दिया गया।
इधर, विभागीय अधिकारियों के अनुसार ये छात्राएं पिछले वर्ष आईटीआई करने आई थीं, जिनका कोर्स पूरा हो चुका है। अश्विनी के हॉस्टल में आईटीआई की ब्रांच कोपा और फिटर में पढ़ने वाली छात्राएं रहती थीं। हॉस्टल में खाने, सफाई और अन्य तरह की शिकायतें हमेशा रहती थीं। कॉलोनी में रहने वाले लोगों ने बताया कि अश्विनी से सिर्फ हाय हैलो थी, लेकिन कभी ऐसा लगा नहीं कि वह इस तरह की हरकत कर सकता है। 22 अगस्त को इन छात्रों ने आईटीआई में एडमिशन के बावजूद हॉस्टल न मिलने की शिकायत दर्ज कराई थी।
एक साल पहले करीब 150 दिव्यांग छात्र-छात्राएं अश्विनी के हॉस्टल में रहते थे। इसमें से 40 छात्राएं और 110 छात्र थे। इन सभी को रहने खाने के लिए सामाजिक न्याय विभाग से 4-4 हजार रुपए प्रति छात्र के हिसाब से दिया जाता था। लगातार हो रही शिकायतों के चलते सामाजिक न्याय विभाग ने हाल ही में आईटीआई के प्रिसिंपल को हॉस्टल का नोडल अधिकारी बनाया था। वहीं लगातार शिकायतें न रुकने के चलते छात्रों का हॉस्टल बदल दिया गया।
बच्चों पर लगाया था नशे की गोलियां खाने का आरोप:- हॉस्टल संचालक ने अफसरों से शिकायत दर्ज कराई की ये छात्र आपस में लड़ाई करते। गालियां देते हैं और नशा भी करते हैं। रात को 10 बजे फोन कर बदतमीजी करते हैं। इस पर संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय ने कहा कि आगे से कुछ हो तो हमें सूचित करें इसके बाद हम बताएंगे की क्या कार्रवाई करना है।
सरकारी पैसा न रुके इसलिए अश्विनी खुद करवाता था दिव्यांगों से शिकायतें :- कुछ अधिकारियों ने बताया कि सरकार की तरफ छात्रों का पैसा न रुक जाए इसलिए अश्विनी स्वयं दिव्यांगों के साथ मिलकर शिकायतें करवाता था। पिछले साल दिव्यांगों ने करीब 10 से 15 बार प्रदर्शन कर कभी कलेक्टर कभी सामाजिक न्याय तो कभी मुख्यमंत्री निवास तक हॉस्टल में खराब खाने और स्कॉलरशिप सहित लैपटॉप न मिलने की शिकायत दर्ज कराई थी। यह सब हॉस्टल संचालक स्वयं करता था।
सामाजिक न्याय विभाग के संयुक्त संचालक मनोज तिवारी ने बताया कि इस वर्ष तो दिव्यांगों का करीब सात लाख रुपए सामाजिक न्याय विभाग आईटीआई को दे चुका है। यह फंड वहां से छात्रों के अकाउंट में ट्रांसफर होता है। इसमें से साढ़े चार लाख रुपए गोविंदपुरा आईटीआई और डेढ़ लाख गैस राहत आईटीआई में पढ़ने वाले दिव्यांगों के थे। ये दिव्यांग कोपा और फिटर दो ब्रांच में पढ़ते हैं और एक साल का कोर्स करने के बाद ट्रेनिंग के लिए दिव्यांग जाते हैं। शाहजहानाबाद स्थित दृष्टि एवं श्रवण बाधित छात्रावास ही सामाजिक न्याय विभाग संचालित करता है। कुछ एनजीओ जो मूक बधिरों के लिए काम करते हैं, इन्हें सामाजिक न्याय विभाग से अनुदान मिलता है। बता दें कि मार्च माह में इस हॉस्टल में मूकबधिर दिव्यांग सोहनलाल की मौत संजय तरण पुष्कर में डूबकर हुई थी।
अश्विनी की पत्नी आरती चलाती थी हॉस्टल, किसी को शक तक नहीं हुआ :- अश्विनी शर्मा अवधपुरी स्थित क्रिस्टल आईडल सिटी के मकान नंबर -172 में रहता था। इसी में दिव्यांग लड़कियों का हास्टल भी संचालित था। अश्विनी की पत्नी आरती हॉस्टल की देखरेख करती थी। मामले का खुलासा होने के बाद से आरती यहां नहीं है। जिस डुप्लेक्स में अश्विनी रहता है, उसमें वह 6 माह पहले ही शिफ्ट हुआ था। इससे पहले वह लड़कियों के साथ उसके सामने वाली बिल्डिंग में रहता था। बीते 11 दिनों से छात्राएं दिखाई नहीं दे रही थीं। अश्विनी ने जिस डुप्लेक्स में हॉस्टल खोल रखा था, वह अजय रायखेरे का है। उससे किराए पर ले रखा था।
अश्विनी गाड़ी से लड़कियों को कॉलेज छोड़ने जाता था क्रिस्टल कॉलोनी में रहने वाले एक लड़के ने बताया कि अश्विनी, दिव्यांग लड़कियों को गाड़ी से आईटीआई कॉलेज छोड़ने जाता था। मूक-बधिर होने के चलते वे किसी से बात भी नहीं कर सकती थीं, न सुन सकती थीं, इसलिए किसी को कुछ पता नहीं चलता था।

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