भाजपा के सर्वे में कई मंत्रियों की हालत कमजोर, पार्टी में ही विरोध - .

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Tuesday, 31 July 2018

भाजपा के सर्वे में कई मंत्रियों की हालत कमजोर, पार्टी में ही विरोध

भाजपा के सर्वे में कई मंत्रियों की हालत कमजोर, पार्टी में ही विरोध

विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भारतीय जनता पार्टी लगातार चौथी बार सरकार बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। चुनाव में मजबूत प्रत्याशी उतारने के लिए पार्टी अब तक तीन सर्वे करवा चुकी है,चौथा चल रहा है। पार्टी के सामने आ रही रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आ रहे हैं उनमें ज्यादातर मंत्रियों की हालत भी बेहद कमजोर बताई जा रही है। दरअसल, मंत्रियों के पास खुद की कोई उपलब्धि नहीं है। उन्होंने चुनाव के दौरान जो वादे किए थे, वे भी पूरे नहीं हो पाए हैं। कुछ मंत्री कांग्रेस के कमजोर प्रत्याशियों की वजह से जीतते रहे हैं।
लालसिंह आर्य- भिण्ड जिले की गोहद विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। 2008 में कांग्रेस के माखनलाल जाटव से चुनाव हारे। जाटव की हत्या के बाद उपचुनाव हुआ, जिसमें उसके बेटे रणवीर सिंह जाटव से 2009 में हारे। मौजूदा दौर में स्थानीय स्तर पर फोरलेन सड़क सिंध का पानी लाने की योजना सहित 110 करोड़ की पेयजल योजना पूरी न होने से नाराजगी।
माया सिंह - ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र। कम समय देने से नाराजगी। स्थानीय पार्षद सतीश सिकरवार के समर्थक विरोध में। अनूप मिश्रा के समर्थक भी बदलाव चाहते हैं। माया सिंह पिछला चुनाव मात्र 12 सौ से भी कम वोटों से जीती थीं । वे खुद भी चुनाव लड़ने की इच्छुक नहीं बतायी जा रही है।
जयभान सिंह पवैया - ठाकुरों के वर्चस्व वाली सीट है लेकिन पवैया के व्यवहार से कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। इलाके के कद्दावर नेता हैं। पार्टी के सामने कोई विकल्प नहीं है।
यशोधरा राजे सिंधिया- शिवपुरी से विधायक हैं। कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय की कमी। सड़कों की बदहाल स्थिति और सिंध पेयजल योजना का क्रियान्वयन न होना मुख्य समस्याएं।
संजय पाठक -कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से विधायक हैं। कांग्रेस छोड़कर आए थे। पार्टी कार्यकर्ता नाराज हैं। वजह है क्षेत्र में समानांतर भाजपा खड़ी कर ली है।
गौरीशंकर बिसेन - बालाघाट विधानसभा क्षेत्र से चुने गए हैं। क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। सरेखा में ओव्हरब्रिज बनवाने का वादा भी अधूरा रहा। आय से अधिक संपत्ति का मामला हाई कोर्ट में।
ललिता यादव -छतरपुर से विधायक हैं। ब्राह्मण वर्ग में नाराजगी। महिला कोटे से मंत्री बनी। रिश्तेदारों के वर्चस्व से जनता परेशान कार्यकर्ता नाराज।
सूर्यप्रकाश मीणा- शमशाबाद से निर्वाचित । सीएम से नजदीकी के चलते मंत्री बने। विवादों में घिरने से छवि खराब। बेटे की वजह से कार्यकर्ताओं में नाराजगी।
सुरेंद्र पटवा-भोजपुर से विधायक हैं। बाहरी होने का मुद्दा बनाकर कार्यकर्ताओं के बीच ही मतभेद। संघर्ष की स्थिति।
शरद जैन -सक्रियता कम होने से कार्यकर्ता और जनता दोनों नाराज। स्वास्थ्य खराब होने के कारण क्षेत्र में संपर्क कम।
डॉ गौरीशंकर शेजवार- सांची से विधायक हैं। रूखे स्वभाव के कारण कार्यकर्ताओं में नाराजगी। 2008 में चुनाव हार चुके। अब बेटे कमुदित शेजवार का नाम टिकट के लिए आगे बढ़ा रहे हैं।
रूस्तम सिंह - मुरैना से विधायक। गैर गुर्जर जातियों में असंतोष ।2013 में 16 सौ वोट से चुनाव जीते। 2008 में हार गए थे।
कुसुम महदेले - पन्ना से विधायक। व्यवहार को लेकर कार्यकर्ताओं और आम लोगों को शिकायत । 2008 चुनाव हार गई थी । स्थानीय स्तर पर कोई काम नहीं किए। सिर्फ जातिगत वोट ही मुख्य आधार ।
रामपाल सिंह - सिलवानी विधायक की पुत्रवधु द्वारा आत्महत्या करने से रघुवंशी समाज में नाराजगी। कार्यकर्ताओं की राय में चुनावी मुद्दा बनने से पार्टी को नुकसान।
ओमप्रकाश धुर्वे - आदिवासी मंत्री शहपुरा, जिला मंडला से विधायक हैं। क्षेत्र में स्थानीय चुनाव के परिणाम विपरीत रहे। कार्यकर्ता भी नाराज। पत्थरगड़ी के विरोध से समाज ने हुक्कापानी बंद करवा दिया था।
दस मंत्री हारे थे 2013 के चुनाव में :- 2013 के चुनाव में भी प्रदेश में दस मंत्री चुनाव हार गए थे। इनमें वरिष्ठ मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, रामकृष्ण कुसमरिया, अनूप मिश्रा, करण सिंह वर्मा, अजय विश्नोई, बृजेंद्र प्रताप सिंह, हरिशंकर खटीक, दशरथ सिंह लोधी, केएल अग्रवाल, देवी सिंह सरयाम शामिल हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता राज्यमंत्री दर्जा डॉ हितेष वाजपेई कहते हैं कि पार्टी लगातार फीडबैक लेती रहती है। मुख्यमंत्री ने भी सभी विधानसभा क्षेत्रों का अध्ययन करवा लिया है। सभी परिस्थितियों से पार्टी अवगत है।

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