आठवीं तक किसी छात्र को नहीं कर सकते फेल : हाईकोर्ट - .

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Friday, 13 July 2018

आठवीं तक किसी छात्र को नहीं कर सकते फेल : हाईकोर्ट

आठवीं तक किसी छात्र को नहीं कर सकते फेल : हाईकोर्ट

हाई कोर्ट ने कहा है कि 14 वर्ष की आयु तक शिक्षा भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 में मौलिक अधिकार है। 8वीं तक किसी भी छात्र को अनुत्तीर्ण नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने डीपीएस स्कूल दुर्ग के प्रबंधन को एक सप्ताह के अंदर आवश्यक प्रगति कार्ड जारी कर छात्र को 9वीं में प्रवेश देने का आदेश दिया है। दिल्ली पब्लिक स्कूल दुर्ग में शिक्षा सत्र 2017-2018 में कक्षा 8वीं के छात्र की उपस्थिति कम होने पर प्रबंधन ने परीक्षा में बैठने से रोक दिया। बाद में जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश पर छात्र को परीक्षा में शामिल किया गया। छात्र चार पेपर में शामिल हुआ। संस्कृत व गणित का पेपर नहीं दिया। परिणाम घोषित होने पर उसे फेल कर दिया गया। 9वीं कक्षा में प्रवेश नहीं दिए जाने पर नाबालिग छात्र की ओर से उनके पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
याचिका में कहा गया कि मौलिक अधिकार में शिक्षा का अधिकार शामिल है। अनिवार्य शिक्षा अनियम 2009 के प्रावधानों के अनुसार किसी भी स्कूल में प्रवेश लेने वाले बच्चे को फेल कर स्कूल से निष्कासित नहीं किया जा सकता। याचिका पर जस्टिस संजय के. अग्रवाल की कोर्ट में सुनवाई हुई। स्कूल प्रबंधन ने जवाब प्रस्तुत कर कहा कि छात्र 207 दिन में केवल 11 दिन स्कूल में उपस्थित हुआ था। इसके अलावा संस्कृत व गणित की परीक्षा नहीं दी। इस कारण से उसे 9वीं कक्षा में प्रवेश नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने मामले में सुझाव देने के लिए अधिवक्ता वस्र्ण शर्मा को न्यायमित्र नियुक्त किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात आई कि छात्र को उपस्थित कराने की जिम्मेदारी स्कूल की होती है।
हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि 14 वर्ष की आयु तक शिक्षा का अकिार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसका मौलिक अधिकार है। इस कारण से 8वीं तक किसी भी छात्र को अनुत्तीर्ण नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्कूल प्रबंधन को आदेश प्राप्त होने के एक सप्ताह के अंदर आवश्यक रिपोर्ट कार्ड जारी कर छात्र को 9वीं में प्रवेश देने का आदेश दिया है। 
बच्चों को नहीं निकाल सकता स्कूल :- याचिका में सचिव स्कूल शिक्षा, डीईओ दुर्ग, डीपीएस स्कूल व छत्तीसगढ़ बाल कल्याण आयोग को पक्षकार बनाया गया था। बाल कल्याण आयोग ने जवाब में कहा बच्चों के अधिकार के अनुच्छेद 16 में निहित प्रावधानों के आधार पर अनिवार्य शिक्षा अनियम 2009 में किसी भी बच्चे को प्राथमिक शिक्षा में एक कक्षा में रोका नहीं जा सकता है। इसके अलावा उसे स्कूल से निकाला भी नहीं जा सकता।

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