मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव विशेष: कुछ ऐसी थी तेरह की केसरिया तस्वीर - .

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Sunday, 1 July 2018

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव विशेष: कुछ ऐसी थी तेरह की केसरिया तस्वीर

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव विशेष: कुछ ऐसी थी तेरह की केसरिया तस्वीर

साल 2018 मध्यप्रदेश के लिए चुनावी साल है। चूंकि यहां अब सियासी सरगर्मियां जोर पकड़ने लगी हैं, मध्यप्रदेश की मौजूदा सियासी तस्वीर के बारे में जानना दिलचस्प होगा। विधानसभा चुनाव 2018 से पहले जानिए प्रदेश के किस इलाके में किस पार्टी का दबदबा रहा।
दरअसल, मध्यप्रदेश में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होता है। 2003 से भाजपा की सरकार है। इससे पहले 10 साल कांग्रेस ने राज किया था। आखिरी बार विधानसभा चुनाव 2013 में हुए थे और भाजपा ने कुल 230 विधानसभा सीटों में से 165 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। कांग्रेस 58 सीटों तक सिमट गई थी। बसपा ने 4 और अन्य ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
    • मालवा-निमाड़ में भाजपा का दबदबा :- मालवा-निमाड़ भाजपा का गढ़ रहा है, जहां कुल 66 सीटें हैं। 2008 के चुनाव में इन 66 में से 40 सीटें भाजपा ने जीती थी और 25 कांग्रेस ने। एक पर निर्दलीय का कब्जा था। वहीं 2013 में भाजपा की बढ़त 56 पर पहुंच गई। भोपाल और आसपास की 36 में से 29 सीटों पर कांग्रेस हार गई।
    • मालवा में इंदौर जिले की नौ विधानसभा सीटों के अलावा धार, देवास, झाबुआ, उज्जैन, शाजापुर-आगर, रतलाम, मंदसौर और नीमच जिले की सीटें हैं। वहीं खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी की सीटें निमाड़ में आती हैं।
    • 2013 में इंदौर की नौ में से आठ सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। धार जिले की सरदारपुर, मनावर, धरमपुरी, धार और बदनावर सीटों पर भाजपा जीती थी। कांंग्रेस को सिर्फ कुक्षी में जीत मिली थी।

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