5 दिन पहले चोरी हुए थे ट्रैप कैमरे, ध्यान देते तो बच जाती बाघिन की जान - .

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Wednesday, 11 July 2018

5 दिन पहले चोरी हुए थे ट्रैप कैमरे, ध्यान देते तो बच जाती बाघिन की जान

5 दिन पहले चोरी हुए थे ट्रैप कैमरे, ध्यान देते तो बच जाती बाघिन की जान

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और होशंगाबाद सामान्य वन मंडल की सीमा पर जहां बाघिन की मौत हुई थी, उससे कुछ दूरी पर लगे ट्रैप कैमरों को बदमाशों ने चुरा लिए थे। यह चोरी बाघिन का शव मिलने की घटना से पांच दिन पहले 5 जून को हुई थी। ट्रैप कैमरे टाइगर रिजर्व में शिकारियों की धरपकड़ के लिए लगाए गए थे। ट्रैप कैमरे चुराने के दूसरे ही दिन 6 जून को बदमाशों ने पास से गुजर रही देनवा नदी के किनारे रखी एक नाव भी चुराई थी। इतना सबकुछ होने के बावजूद अधिकारियों को भनक नहीं लगी और इसी जंगल में बाघिन की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। बाघिन का शव 11 जून को बरामद किया। बाघिन का शव मिलने से पहले हुई घटना सीधे तौर पर टाइगर रिजर्व में शिकारियों के सक्रिय होने का संकेत दे रही है। यदि इन घटनाओं पर समय रहते सबक लिया होता तो बाघिन की जान बच जाती।
होशंगाबाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) की बागरातवा बफर रेंज व सामान्य वन मंडल के सब डिवीजन सोहागपुर की बागरातवा रेंज सीमा पर 8 साल की बाघिन संदिग्ध स्थिति में मृत मिली थी। यह सीमा देनवा नदी के बिल्कुल पास है। नदी के एक तरफ टाइगर रिजर्व और दूसरी तरफ सामान्य वन मंडल की सीमा लगती है। सूत्रों के मुताबिक रिजर्व वाले जंगल में शिकारियों की आवाजाही नदी के रास्ते होती है। जिन पर नजर रखने व वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए चार ट्रैप कैमरे लगे थे, जो चोरी हो गए।
इसके अलावा नदी से मछली पकड़ने में उपयोग की जाने वाली नाव चोरी गई थी। यह नाव सेहरा गांव के एक व्यक्ति की थी जो नदी में मछली पकड़ने का काम करता था। हालांकि रिजर्व के अधिकारियों को चोरी गई नाव मिल गई हैं लेकिन ट्रैप कैमरों का पता नहीं चल पाया है। सूत्रों के मुताबिक नदी के रास्ते शिकारी रिजर्व की सीमा में दाखिल हुए थे। इसके लिए चोरी की नाव का उपयोग किया गया। ट्रैप कैमरे भी शिकार करने की नीयत से ही चुराए गए थे।
बाघिन ने मौत से पहले किया था शिकार :- बाघिन ने मौत से पहले रिजर्व की सीमा में दो बायसन का शिकार किया था। ये शिकार 8 जून को हुए थे। सूत्रों की माने तो शिकारियों ने बाघिन का शिकार करने बायसन के मांस में जहर मिलाया था। हालांकि फॉरेंसिक रिपोर्ट में जहर की पुष्टि होने के पहले ये कहना जल्दबाजी होगा।
यह थी सीमा विवाद की वजह :- बाघिन का शव मिलने के बाद सीमा विवाद सामने आ चुका है। विवाद इस बात का था कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में जहर की पुष्टि हुई तो अधिकारियों पर घटना की जिम्मेदारी तय होगी। विवेचना करनी होगी, आरोपितों को गिरफ्तार और कोर्ट की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। साथ ही नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) को जवाब देना पड़ेगा। इन्हीं सब कारणों के चलते अधिकारी शव वाले स्थान को एक-दूसरे की सीमा में बताने में लगे थे। हालांकि होशंगाबाद डीएफओ विजय सिंह कह चुके हैं कि जहां बाघिन का शव मिला वह सामान्य वन मंडल व एसटीआर दोनों की सीमा में आता है। दोनों ही संयुक्त जांच कर रहे हैं। रिजर्व के डायरेक्टर एल कृष्णमूर्ति भी संयुक्त जांच करने की बात स्वीकार चुके हैं।

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