जीएसटी चुकाया ही नहीं, मुफ्त दे दिए आईपीएल मैचों के 3 करोड़ 20 लाख के टिकट - .

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Friday, 20 July 2018

जीएसटी चुकाया ही नहीं, मुफ्त दे दिए आईपीएल मैचों के 3 करोड़ 20 लाख के टिकट

जीएसटी चुकाया ही नहीं, मुफ्त दे दिए आईपीएल मैचों के 3 करोड़ 20 लाख के टिकट

इंदौर में हुए आईपीएल मैचों में मुफ्त बांटे गए टिकटों का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। मामले को लेकर दायर जनहित याचिका में कहा है कि चार मैचों में करीब 3 करोड़ 20 लाख रुपए के मुफ्त टिकट बांटे गए थे। इस राशि पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी चुकाया जाना था लेकिन जमा नहीं कराया गया। ये मुफ्त टिकट जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, ईओडब्ल्यू सहित अन्य विभागों को दिए गए थे। जनहित याचिका दिग्विजयसिंह भंडारी की तरफ से सीनियर एडवोकेट मनोहरलाल दलाल ने दायर की है। गौरतलब है कि 4, 6, 12 और 14 मई को इंदौर में आईपीएल के मैच हुए थे। इंदौर स्टेडियम किंग्स इलेवन पंजाब का होम ग्राउंड है। मैचों के बाद किंग्स इलेवन पंजाब के मैनेजर ने खुद स्वीकारा था कि हर एक मैच के लिए 3 करोड़ रुपए के टिकट बिकने थे। करीब 80 लाख रुपए के टिकट हर मैच के लिए मुफ्त बांटे गए थे। चार मैचों में यह रकम करीब तीन करोड़ 20 लाख रुपए होती है। ये टिकट जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, ईओडब्ल्यू सहित अन्य विभागों के शासकीय अधिकारियों को दिए गए थे।
टीम के मैनेजर ने यह भी स्वीकारा था कि मुफ्ट टिकट के लिए अधिकारियों ने दबाव बनाया था। याचिका में कहा है कि विवाद के बाद कलेक्टर ने खुद स्वीकारा था कि हर मैच में जिला प्रशासन और चीफ सेक्रेटरी को एक-एक बॉक्स दिया जाता है। एक बॉक्स की दर 10 लाख रुपए है। ये बॉक्स तीन मैचों में लिए गए थे। इस तरह जिला प्रशासन ने 60 लाख रुपए के बॉक्स मुफ्त लिए थे। टीम द्वारा एमपीसीए के जरिए बेचे गए टिकटों पर तो जीएसटी चुकाया गया लेकिन मुफ्त बांटे गए 3 करोड़ 20 लाख रुपए के टिकटों पर कोई जीएसटी नहीं चुकाया गया।
18 फीसदी की दर से यह रकम करीब 57 लाख 60 हजार रुपए होती है। इस रकम को चुकाने की जिम्मेदारी उसकी थी जिसने इसे खरीदा या जिसे यह टिकट मुफ्त दिए गए। एडवोकेट दलाल ने बताया कि याचिका में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए और ब्लैकमेलिंग, टैक्स चोरी और धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाए। याचिका में कलेक्टर, डीआईजी, अधीक्षक मप्र राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, चीफ सेक्रेटरी, डिप्टी डायरेक्टर सीबीआई और एमपीसीए को पक्षकार बनाया गया है।

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