भोपाल जेल ब्रेक मामले में जेल विभाग के दस अधिकारी-कर्मचारी जिम्‍मेदार - .

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Monday, 25 June 2018

भोपाल जेल ब्रेक मामले में जेल विभाग के दस अधिकारी-कर्मचारी जिम्‍मेदार

भोपाल जेल ब्रेक मामले में जेल विभाग के दस अधिकारी-कर्मचारी जिम्‍मेदार

30-31 अक्टूबर 2016 की दरम्यानी रात सेंट्रल जेल भोपाल से आठ सिमी के विचाराधीन कैदियों के फरार होने और पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की जांच के लिए गठित जस्टिस एसके पांडे आयोग की 17 पेज की रिपोर्ट सोमवार को विधानसभा में रखी गई।
रिपोर्ट में पुलिस अधिकारियों को क्लीनचिट देते हुए कहा कि परिस्थितियों के हिसाब से कार्यवाही जायज थी। पुलिस बल ने सिमी आतंकियों को सरेंडर करने को कहा था पर उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। ऐसे में पुलिस को भी गोली चलानी पड़ी और आठों बंदी मारे गए। 30-31 अक्टूबर की दरम्यानी रात केंद्रीय जेल भोपाल से सिमी के आठ विचाराधीन कैदी फरार हो गए थे। 31 अक्टूबर को गुनगा थाना क्षेत्र में आने वाले मनीखेड़ी गांव के पास आठों बंदियों की पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें वे मारे गए। मामले की न्यायिक जांच का जिम्मा जस्टिस एसके पांडे को सौंपा था।
जस्टिस पांडे ने 24 सितंबर 2017 को प्रतिवेदन सरकार को सौंप दिया था, जिसे कैबिनेट ने स्वीकार किया और जेल विभाग ने आयोग की सिफारिशों पर कार्यवाही की। इसके बाद रिपोर्ट को सदन में रखा गया। रिपोर्ट में कैदियों के जेल से भागने को लेकर जेल विभाग के दस अधिकारियों-कर्मचारियों को जिम्मेदार माना गया। इनके खिलाफ जेल विभाग ने विभागीय जांच शुरू कर दी है। एसएएफ के वे अधिकारी-कर्मचारी जो उस समय ड्यूटी पर थे, उनके खिलाफ भी विभागीय जांच शुरू करते हुए वास्तविक दोषी अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही करने की अनुशंसा की गई। इसे स्वीकार करते हुए एसएएफ गार्ड व कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जा चुकी है।
मुठभेड़ की घटना को जायज ठहराते हुए आयोग ने कहा कि परिस्थितियों के हिसाब से यह जायज था। विचाराधीन बंदियों को चेतावनी देकर सरेंडर करने के लिए कहा गया था पर जब उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी तो कोई और रास्ता नहीं बचा था। कैदियों ने फरार होने के लिए प्रहरी रामशंकर यादव की हत्या कर दी थी। आयोग ने घटना की जांच के लिए सेंट्रल जेल और मुठभेड़ के घटना स्थल का दौरा भी किया था।
जेल विभाग को गृह विभाग में मर्ज करने की सिफारिश अमान्य :- जांच आयोग ने जेल विभाग को गृह विभाग में मर्ज कर उसका हिस्सा बनाने की सिफारिश की थी, ताकि दोनों विभाग में अच्छा सामंजस्य स्थापित हो जाए। गृह विभाग ने इस पर सैद्धांतिक सहमति दी है पर जेल विभाग का मत है कि विभाग को सुदृढ़ करने की कार्यवाही चल रही है। रिक्त पदों को भरने के लिए लोकसेवा आयोग और प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड के माध्यम से कार्यवाही की जा रही है। सरकार ने दोनों विभाग को एक करने की सिफारिश को अस्वीकार कर दिया है।

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