भोपाल में कहीं नहीं बनती खाने की बर्फ फिर कौन सी बर्फ खा-पी रहे हैं आप - .

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Friday, 1 June 2018

भोपाल में कहीं नहीं बनती खाने की बर्फ फिर कौन सी बर्फ खा-पी रहे हैं आप

भोपाल में कहीं नहीं बनती खाने की बर्फ फिर कौन सी बर्फ खा-पी रहे हैं आप

गन्ने का रस, नीबू-पानी, शिकंजी हो या फिर खाने-पीने दूसरे चीजें। सभी को ठंडा करने के लिए सफेद रंग की बर्फ मिलाई जा रही है, लेकिन यह बर्फ आपकी सेहत बिगाड़ सकती है। वजह, इस बर्फ की कोई जांच नहीं होती। जांच इसलिए नहीं होती कि शहर में खाद्य बर्फ बनाने की कोई फैक्ट्री नहीं है, जबकि अखाद्य बर्फ की छह फैक्ट्री हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि शहर में रोजाना खपने वाली सैकड़ों क्विंटल बर्फ कहां से आ रही है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया ने (एफएसएसएआई) खाद्य व अखाद्य बर्फ में फर्क करने के लिए अखाद्य बर्फ को नीला करने को कहा है। एक महीने पहले जारी इस आदेश का भोपाल समेत मप्र में कहीं भी पालन नहीं हो रहा है। अब 1 जून से बर्फ निर्माताओं पर सख्ती करने की तैयारी है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि भोपाल में अखाद्य वर्फ बनाने का लाइसेंस छह फैक्ट्रियों के पास है, पर खाद्य वर्फ भोपाल में कहीं नहीं बनती। उधर, शहर में हर जगह बर्फ के खाने-पीने में उपयोग हो रहा है। दूसरे जिलों से भी भोपाल में बर्फ नहीं आ रही है। इससे साफ है कि शहर में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर बर्फ अखाद्य श्रेणी की ही है। इसलिए नीली की जा रही अखाद्य बर्फ बर्फ की किसी तरह की पैकिंग नहीं की जाती। ऐसे में यह पता करना मुश्किल होता है कि कौन सी बर्फ खाने वाली है और कौन सी नहीं। दुकानदार इसका फायदा उठाकर अखाद्य बर्फ भी खाने-पीने की चीजों में मिलाकर बेचते हैं। यह समस्या अकेले भोपाल या मध्यप्रदेश की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। लिहाजा एफएसएसआई ने अखाद्य बर्फ का रंग नीला करने के निर्देश महीने भर पहले दिए थे।
इसलिए नुकसानदेह है अखाद्य बर्फ :- इसका उपयोग किसी चीज को बाहर से ठंडा करने के लिए किया जाता है। लिहाजा इस बर्फ की बड़ी सिल्ली बनाई जाती है। कारखानों में साफ लिखा रहता है यह बर्फ खाने योग्य नहीं है। इसके बाद भी इसके टुकड़े कर खान-पान की चीजों में इस्तेमाल किया जा रहा है। अखाद्य बर्फ में उपयोग होने वाले पानी के लिए कोई मापदंड नहीं है। साफ-सफाई का ध्यान भी नहीं रखा जाता।
खाद्य बर्फ में इन मापदंडों का पालन जरूरी
- खाद्य बर्फ बनाने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन से लाइसेंस लेना होता है।
- बर्फ बनाने के लिए आरओ का पानी इस्तेमाल करना होता है।
-कारखाने में साफ-सफाई को विशेष ध्यान रखना होता है। कर्मचारियों का मेडिकल कराना होता है।
- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत लैब में जांच कराई जा जा सकती है।
सभी छह फैक्ट्रियों को दिया नोटिस, अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी :- खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि भोपाल में अखाद्य बर्फ बनाने वाली सभी छह फैक्ट्रियों को रंग नीला करने के लिए कहा गया था। इसके बाद भी किसी ने इस पर अमल नहीं किया तो उन्हें नोटिस जारी किया गया है। 1 जून से इनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है। अधिकारियों के मुताबिक अखाद्य बर्फ रंग नहीं बदला जाता तो इसे खाद्य मानते हुए इसके नमूने लिए जाएंगे। यह देखा जाएगा कि किस पानी से बन रही है। कर्मचारियों का मेडिकल है या नहीं। नमूने फेल होने पर 3 से 5 लाख रुपए तक जुर्माना और छह महीने की सजा हो सकती है।
भोपाल की स्थिति :- भोपाल में हर दिन बर्फ की खपत खान-पान में- 150 क्विंटल अखाद्य बर्फ की फैक्ट्री- 6  बर्फ को रंगीन करने में खर्च- 15 रुपए रोज प्रति कारखाना जुर्माना- 3 से 5 लाख रुपए तक जुर्माना और छह महीने की सजा हो सकती है नमूने फेल होने पर
अखाद्य वाले नहीं कर सकते कार्रवाई :- संयुक्त संचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन बृजेश सक्सेना ने बताया कि न खाने योग्य बर्फ का लाइसेंस उनके यहां से जारी नहीं किया जाता। इस वजह से उन पर कार्रवाई भी नहीं कर सकते। रंग बदलने को लेकर निर्देश दिए गए थे। 1 जून से इसे सख्ती से लागू किया जाएगा।

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