चंद्रमा की दूरी से बड़ी रेल लाइन बना चुका है भिलाई प्लांट - .

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Thursday, 14 June 2018

चंद्रमा की दूरी से बड़ी रेल लाइन बना चुका है भिलाई प्लांट

चंद्रमा की दूरी से बड़ी रेल लाइन बना चुका है भिलाई प्लांट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भिलाई स्टील प्लांट के अत्याधुनिक विस्तार को देश को समर्पित कर रहे हैं। भिलाई प्लांट का देश के विकास में बड़ा योगदान है। जानकर हैरानी होती है कि इस प्लांट में बने लोहे से लगभग 4,96,761 किलोमीटर रेल लाइन बिछाई गई है जो पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी से भी 1.12 लाख किलोमीटर ज्यादा है।
जानिए राष्ट्र निर्माण में प्लांट का योगदान :- फौलाद की दुनिया में भिलाई इस्पात संयंत्र का सिर्फ नाम ही काफी है। यहां की विशाल धमन भट्टियों से पिघलकर पिछले 60 साल से निकल रहा लाल लोहा देश के विकास की तस्वीर बदलने के साथ ही तकदीर भी बदल रहा है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक ही नहीं, सरहदों के पार भी इसकी ताकत अपना लोहा मनवा रही है। दुनिया के लगभग सभी देशों के लोग यहां काम करते हैं, यही वजह है कि इसे मिनी वर्ल्ड भी कहा जाता है। यह प्लांट अब तक इतनी लंबी रेल पटरियों का निर्माण कर चुका कि उससे पूरी पृथ्वी को 12 बार लपेटा जा सकता है। देश के सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात कारखाने के लिए 11 बार प्रधानमंत्री ट्रॉफी पाने वाला सोवियत रूस की मदद से बना यह संयंत्र आज दुनिया में भारत का परचम लहरा रहा है।
रूस के सहयोग से भारत की पहला इस्पात प्लांट :- भारत और पूर्ववर्ती सोवियत संघ की सरकारों के समझौते के बीच दो फरवरी 1959 को एक मिलियन टन (एमटी) क्षमता के साथ भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) शुरू हुआ था। विस्तार के साथ यह संयंत्र आज 7.5 एमटी का हो चुका है। 11 बार देश के सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात कारखाने के लिए प्रधानमंत्री ट्रॉफी प्राप्त यह संयंत्र राष्ट्र में रेल पटरियों और भारी इस्पात प्लेटों का एकमात्र निर्माता और संरचनाओं का प्रमुख उत्पादक है। इस संयंत्र की वार्षिक इस्पात उत्पादन क्षमता 32 लाख टन से ज्यादा है। यहां से निकला इस्पात देश की रक्षा, विकास और मेक इन इंडिया के सपनों को साकार कर रहा है।
बीएसपी था कभी सर्वोच्च प्राथमिकता :- सन 1956 में स्थापित और करीब 60 साल से देश को फैलादी मजबूती देने वाले भिलाई स्टील प्लांट पर, एक वक्त था जब सीधे प्रधानमंत्री की नजर रहती थी। सरकार के लिए यह प्लांट कितना महत्वपूर्ण रहा, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू तीन बार यहां आए। सबसे पहले 16 दिसंबर 1957 को बर्मा के प्रधानमंत्री यू नू के साथ, राजीव गांधी भी उनके साथ थे जिनकी उम्र तब महज 13 साल थी। इसके तीन साल बाद 27 अक्टूबर 1960 में पंडित नेहरू दोबारा यहां आए। इस बार उन्होंने रेल मिल और स्ट्रक्चरल मिल का उद्धाटन किया। पंडित नेहरू तीसरी और अंतिम बार यहां 15 मार्च 1963 को आए थे। प्रधानमंत्री के लगातार आगमन से बीएसपी की सारी व्यवस्था एकदम चौकस रहा करती थी। हालांकि पंडित नेहरू के बाद यहां किसी दूसरे प्रधानमंत्री के कदम नहीं पड़े।
अब मोदी की नजर में होगा बीएसपी :- करीब 55 साल बाद, इतिहास अपने को दोहराने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज प्लांट में हैं। यहां वे यूआरएम (यूनिवर्सल रेल मिल), बीआरएम (बार एंड रॉड मिल) और फर्नेस-8 व एसएमएस-3 (स्टील मैल्टिंग शॉप) राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इतना ही नहीं, मोदी यहां फौलाद बनते हुए भी देखेंगे।

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