कानून बनाकर पुख्ता किए मीसाबंदियों के अधिकार, आजीवन मिलेगी सम्मान निधि - .

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Wednesday, 27 June 2018

कानून बनाकर पुख्ता किए मीसाबंदियों के अधिकार, आजीवन मिलेगी सम्मान निधि

कानून बनाकर पुख्ता किए मीसाबंदियों के अधिकार, आजीवन मिलेगी सम्मान निधि

आपातकाल के दौरान मीसा कानून के तहत 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच राजनीतिक व सामाजिक कारणों से बंदी बनाए गए व्यक्तियों को सरकार कानून के जरिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की तरह अधिकार देगी। इसके लिए विधानसभा के मानसून सत्र में लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक बिना चर्चा पारित हो गया। राज्यपाल की अनुमति मिलते ही ये लागू हो जाएगा। इसके तहत आजीवन सम्मान निधि मिलेगी तो चिकित्सा सुविधा सहित अंत्येष्टि राजकीय सम्मान से होगी। फर्जीवाड़ा पकड़ में आने पर सम्मान निधि की वसूली होगी।
विधेयक के प्रभावी होने पर सरकार के खजाने पर 40 करोड़ रुपए का आर्थिक भार आएगा। सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक जहां इस कदम को जायज ठहरा रहे हैं। वहीं, कांग्रेस के विधायक इसे चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने का कदम करार दे रहे हैें।
चुनावी साल में क्यों आई याद: कांग्रेस :- कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत और बाला बच्चन ने सरकार द्वारा बिना चर्चा लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक पारित कराने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि सरकार को बरसों बाद चुनावी साल में इसकी याद क्यों आई। साफ है कि राजनीतिक लाभ की मंशा से चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने यह कदम उठाया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का विशेष रूप से जिक्र करना इस बात की पुष्टि भी करता है। देश की आजादी को ये लोग आजादी नहीं मानते हैं।
आपातकाल लागू करने को लेकर बहस हो सकती है पर संविधान में इसके प्रावधान हैं। इसके बाद हम चुनाव भी हारे और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारी बहुमत से जीत हासिल कर वापसी भी की। बार-बार उनके नाम को लेकर विवाद खड़ा करना बताता है कि यह सिर्फ छवि धूमिल करने की कवायद मात्र है। जबकि, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें दुर्गा का अवतार बताया था।
7-8 सालों से मिल रही है सम्मान निधि: भाजपा :- भाजपा के वरिष्ठ विधायक शंकरलाल तिवारी और ओमप्रकाश सखलेचा ने इसे सरकार का जायज कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि सात-आठ साल से सम्मान निधि मिल रही है। कोई भी कानून बनाने के पहले उसके व्यावहारिक पहलुओं को देखा जाता है। यदि कोई कमी रह जाती है तो प्रशासकीय व्यवस्था में जल्दी दुरुस्त हो जाती है। कानून बनने के बाद हर बदलाव विधानसभा के जरिए ही होता है। उत्तरप्रदेश में मुलायम सिंह यादव सरकार ने मीसाबंदियों को सम्मान निधि दी थी। मायावती ने सरकार में आते उसे बंद कर दिया। इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई और उसे सही ठहराया गया। कई राज्यों में इस तरह की व्यवस्था है। इसमें राजनीति तलाशना बेमानी है।

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