दो साल बाद रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी में होगी पीएचडी की प्रवेश परीक्षा - .

Breaking

Thursday, 7 June 2018

दो साल बाद रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी में होगी पीएचडी की प्रवेश परीक्षा

दो साल बाद रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी में होगी पीएचडी की प्रवेश परीक्षा

दो साल से ज्यादा वक्त से पी-एचडी के लिए इंतजार कर रहे विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी पीएचडी में दाखिला शुरू करने जा रही है। प्रवेश परीक्षा जुलाई में होगी। पीएचडी 2016 के नए नियमों के तहत होगी। हालांकि इतने वक्त बाद दाखिला शुरू करने जा रहा यूनिवर्सिटी प्रशासन अभी तक पीएचडी की रिक्त सीटों का ब्यौरा नहीं जुटा पाया है। इस काम के लिए प्रशासन ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है।
बुधवार को यूनिवर्सिटी में कुलपति प्रो. कपिलदेव मिश्र की अध्यक्षता में प्रवेश समिति की बैठक हुई। इसमें अकादमिक सत्र 2018-19 में विवि शिक्षण विभागों में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के संबंध में 12 जून तक पहली मेरिट जारी कर एडमिशन देने की प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद रिक्त सीटों पर जरूरत के मुताबिक एडमिशन देने पर सहमति बनी।
30 जून तक करें सिलेबस की तैयारी : - एमफिल और पीएचडी के कोर्स वर्क का पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए प्रशासन ने सभी विभागों के अध्ययन मंडल को 30 जून की डेडलाइन दी है। प्रशासन ने कहा कि इससे पहले बैठक आयोजित होकर सिलेबस तैयार कर लिया जाए। इसी बीच कोर्स में पीएचडी और एमफिल की रिक्त सीटों की भी सूची बना ली जाए। जुलाई के दूसरे सप्ताह से ऑनलाइन पीएचडी के लिए आवेदन बुलाना प्रारंभ कर दिया जाए। सितम्बर के पहले हफ्ते में प्रवेश परीक्षा का आयोजन होगा। बैठक में कुलसचिव डॉ.बी भारती, प्रो.अंजना शर्मा, डॉ.ममता राव, प्रो.राकेश बाजपेयी, प्रो.एसएस संधु, डॉ.आरके गुप्ता आदि मौजूद रहे।
नए नियम से पीएचडी में ये होगा  :-
  1. - यूजीसी 2016 के बदले हुए पीएचडी नियम में प्रवेश परीक्षा के दो पेपर होंगे। दोनों 50-50 अंक के। वस्तुनिष्ठ प्रश्न इसमें होंगे। इसके बाद 100 अंक का साक्षात्कार होगा। दोनों में उत्तीर्ण होने के लिए 50 अंक न्यूनतम लाना अनिवार्य होगा। मेरिट सूची लिखित और साक्षात्कार के अनुसार बनेगी।
  2. -एमफिल में भी उपरोक्त प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें अभी सिर्फ प्रवेश परीक्षा देना जरूरी था, लेकिन अब 50 अंक न्यूनतम प्रवेश परीक्षा में लाना अनिवार्य है।
  3. - सुपरवाइजर के पास शोधार्थियों की संख्या भी अलग-अलग हो गई है। प्रोफेसर-8, रीडर -6 और लेक्चरर-4 सीट ही अधिकतम रख सकता है। इससे पहले तक सभी के पास 8-8 सीटें थीं।
  4. - पीएचडी थीसिस जमा करने के लिए अभी रजिस्ट्रेशन के बाद न्यूनतम 2 साल और अधिकतम 5 साल का समय निधारित था। अब न्यूनतम वक्त 3 वर्ष और अधिकतम 6 साल समय सीमा होगी।

No comments:

Post a Comment

Pages