चॉक-ब्लैक बोर्ड नहीं, डिजिटल बोर्ड पर पढ़ेंगे 15 लाख बच्चे - .

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Sunday, 24 June 2018

चॉक-ब्लैक बोर्ड नहीं, डिजिटल बोर्ड पर पढ़ेंगे 15 लाख बच्चे

चॉक-ब्लैक बोर्ड नहीं, डिजिटल बोर्ड पर पढ़ेंगे 15 लाख बच्चे

छत्तीसगढ़ में शिक्षा की तस्वीर बदल रही है। स्कूली शिक्षा में बच्चों की पढ़ाई को बेहद सुविधाजनक और हाइटेक बनाने के लिए अब स्मार्ट क्लास की योजना शुरू हो रही है। प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया मुहिम का असर अब राज्य के सरकारी चार हजार से अधिक हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में दिखेगा। इसी सत्र से स्कूलों में स्मार्ट क्लास तकनीक से 15 लाख बच्चों की पढ़ाई होगी। चॉक और ब्लैक बोर्ड की जगह अब इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड लेंगे। प्रोजेक्टर, डिजिटल स्क्रीन पर बच्चों को न सिर्फ पढ़ाया जाएगा, बल्कि उन्हें मल्टीमीडिया कंटेट और वीडियो के जरिये सीधे प्रैक्टिकल करके पढ़ाया जाएगा।
जैसे अभी तक ब्लेक बोर्ड में शिक्षक भूगोल पढ़ाते समय चॉक के जरिये गोलनुमा आकृति बनाकर बताते थे कि पृथ्वी गोल है, लेकिन अब पृथ्वी किस तरह गोल है, किस दिशा में घूमती है, किन-किन ग्रहों का चक्कर लगाती है, यह स्क्रीन में देख सकेंगे। इसी तरह से फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी के हर प्रैक्टिकल के वीडियो, पिक्चर्स, ग्राफिक्स के जरिए बच्चों को पढ़ाया जा सकेगा। यह बच्चों के त्वरित टेस्ट के लिए उपयोगी होगा। प्रोजेक्टर पर प्रश्न आते ही उसका जवाब देंगे और जवाब सही है या गलत यह तत्काल इंटरनेट की मदद से जान सकेंगे। ऑडियो-वीडियो कंटेट राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के विशेषज्ञ तैयार कर रहे हैं। कक्षा नौवीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं के बच्चों को उनके सिलेबस के आधार पर ऑनलाइन कंटेट पढ़ने के लिए मिलेगा।
केंद्र से मिला समर्थन तो योजना पर लगी मुहर :- राज्य में इस योजना को अफसरों ने पहले ही बना लिया था, लेकिन राज्य के चार हजार से अधिक हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में एक साथ स्मार्ट क्लास करने के लिए बजट कम पड़ रहा थाा। ऐसे में राज्य के 3 हजार 17 स्कूलों के लिए केंद्र सरकार ने 62 करोड़ रुपये की स्वीकृति दे दी है। इसके पहले राज्य सरकार ने 1246 स्कूलों में ई-क्लास के लिए कार्ययोजना बना ली थी। इसके लिए निविदा की प्रक्रिया भी कर दी गई है। अगस्त तक स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सामग्री पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।
जापान में अध्ययन के बाद निकाला फार्मूला :- स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री केदार कश्यप और स्कूल शिक्षा सचिव समेत अन्य अधिकारी जनवरी 2018 में जापान गए थे। सेंटर फॉर क्रिएशन एजुकेशन के अध्ययन के बाद अधिकारियों ने पाया कि यहां की शिक्षा नीति बेहतर होने की वजह ई-क्लास रूम है। अध्ययन कर लौटने के बाद ही शिक्षा विभाग में स्मार्ट क्लास से पढ़ाने की तकनीकी पर फोकस किया गया। उसी समय राज्य का बजट भी बन रहा था। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के लिए स्कूलों में इसे लागू करने का बेहतर अवसर मिला है।

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