झाबुआ जिले में 150 किसानों ने किया जल सत्याग्रह - .

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Thursday, 7 June 2018

झाबुआ जिले में 150 किसानों ने किया जल सत्याग्रह

झाबुआ जिले में 150 किसानों ने किया जल सत्याग्रह


किसान आंदोलन के सातवें दिन किसान यूनियन के सदस्यों ने बड़ी संख्या में गांव बरवेट के पास गोठानिया खुर्द तालाब पर पहुंचकर जल सत्याग्रह किया। लगभग दो घंटे तक 150 के लगभग किसान कमर तक पानी में खड़े रहे। एसडीएम हर्षल पंचोली और एसडीओपी रचना भदौरिया के पहुंचने के बाद ज्ञापन दिया, फिर बाहर निकले। अब मंगलवार को किसान यज्ञ करेंगे।
एसडीएम के नहीं आने तक पानी से नहीं निकले किसान :- 2 घंटे तक किसान गोठानिया तालाब के पानी में खड़े रहे। लगभग 150 किसान इस आंदोलन में शामिल हुए। किसान अध्ािकारियों के आने तक बाहर आने को तैयार नहीं थे। जब एसडीएम हर्षल पंचोली और एसडीओपी रचना भदौरिया पहुंचे, तब उन्हें ज्ञापन देकर किसान बाहर निकले। जल सत्याग्रह में महिलाएं भी शामिल हुई। एसडीएम के पहुंचने पर किसानों ने अपनी समस्याएं उनके सामने रखी। यहां पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए थे। गोठानिया तालाब को छावनी में बदल दिया गया था। जल सत्याग्रह ठीक 10.30 बजे प्रारंभ हुआ और 12.30 बजे तक तालाब में ही खड़े रहकर किसानों ने विरोध दर्ज कराया। किसान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष महेंद्र हामड़, महामंत्री जितेंद्र पाटीदार और महिला किसान कलावती गेहलोत सहित सैकड़ों लोगों में पानी में उतरकर जल सत्याग्रह किया। कई किसान बाहर भी खड़े थे। ये सभी आंदोलन का समर्थन करने आए थे। 
देर से आए अधिकारी :- आंदोलन स्थल पर प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। जिस पर किसानों ने आक्रोश व्यक्त किया। किसानों का कहना था कि प्रशासन किसानों की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने मांग रख दी कि कलेक्टर या प्रभारी मंत्री आकर ज्ञापन लेंगे तभी आंदोलन खत्म करेंगे। डेढ़ बजे के लगभग एसडीएम हर्षल पंचोली पहुंचे। एसडीएम ने किसानों को समझाया। बाद में किसानों ने ज्ञापन दिया। 
ये बताई पेरशानी :- दूध के भाव को लेकर कहा गया कि पानी के भाव में हमारा दूध लिया जा रहा है। प्याज मात्र 80 पैसे किलो लिए गए। खाद की बोरियों के बारे में बताया गया कि सोसायटी से प्राप्त होने वाली खाद की बोरी में 2 से 3 किलो खाद हमेशा कम निकलता है। जबकि वजन 50 किलो लिखा होता है। बीज को लेकर भी अपनी समस्या रखी कि हमारा सोयाबीन 3 हजार स्र्पए क्विंटल खरीदा जाता है और इसे ही बीज के रूप में हमें 6 हजार के भाव से बेचा जाता है। माही परियोजना में चल रहे कार्यों से हमारे खेत खराब हो रहे हैं। इस समय बुवाई करनी है लेकिन खेतों में नालियां बनाने का कार्य किया जा रहा है। 
ये रखी मांगें :- स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू की जाए। किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ किया जाए। दूध के भाव 7.50 स्र्पए प्रति फेट किया जाए। भावांतर योजना किसानों को नुकसान पहुंचा रही है इसे बंद किया जाए। सभी फसलों का उचित मूल्य दिया जाए। किसानों के बच्चों के लिए शिक्षा की उचित व्यवस्था की जाए। जिले में बड़ी मात्रा में नकली बीज और नकली खाद बिक रहा है। इस पर प्रतिबंध लगाया जाए। किसानों को सब्सिडी का पूरा लाभ मिले। फसल खराब होती है तो कहा जाता है की पूरे क्षेत्र की फसल खराब होने पर ही मुआवजा या बीमा मिलेगा। जबकि किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब होने पर हेल्थ इंशोरेंस कंपनी यह नहीं कहती कि सारे लोग बीमार होंगे तभी कंपनी पैसा देगी। इसलिए व्यक्तिगत रूप से बीमा के क्लेम पास हो। 
प्रशासन अलर्ट रहा :- किसानों के जल सत्याग्रह आंदोलन को लेकर पुलिस प्रशासन सुबह से अलर्ट हो गया था। सुबह से ही प्रशासन की ओर से 30 कोटवार और पुलिस की 50 जवानों की टीम को गोठानिया तालाब पर लगा दिया गया था। जहां पर नायब तहसीलदार गजराजसिंह सोलंकी और रायपुरिया थाना प्रभारी कौशल्या चौहान पूरे समय मौजूद रहे।

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