शांति निकेतन में पीएम मोदी और शेख हसीना ने किया बाग्लादेश भवन का उद्घाटन - .

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Friday, 25 May 2018

शांति निकेतन में पीएम मोदी और शेख हसीना ने किया बाग्लादेश भवन का उद्घाटन

शांति निकेतन में पीएम मोदी और शेख हसीना ने किया बाग्लादेश भवन का उद्घाटन

पश्चिम बंगाल में वीरभूम जिले के बोलपुर स्थित रवींद्रनाथ टैगोर के सपनों का शांतिनिकेतन आज ऐतिहासिक क्षण का गवाह बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां विश्वभारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिरकत करने के लिए पहुंचे। इसके बाद उन्होंने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ यहां बने बाग्लादेश भवन का उद्घाटन किया। इससे पहले दीक्षांत समारोह में उनके साथ मंच पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भी मौजूद थीं।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां से जो छात्र डिग्री लेकर जा रहे हैं वो केवल डिग्री ही नहीं ले जा रहे बल्कि देश की गुरु-शिष्य परंपरा के वारिस हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे शांति निकेतन में काफी शांति मिल रही है। विश्व भारती विश्वविद्यालय में पीएम मोदी ने कहा, " छात्रों को जो भी असुविधा हुई उसके लिए मैं माफी मांगता हूं। विश्व भारती विश्वविद्यालय के प्रांगण में मैं मंदिर में मंत्रोच्चारण करने जैसी ऊर्जा महसूस करता हूं।मैं इस विश्वविद्यालय में एक आचार्य की तरह आया हूं, मेहमान की तरह नहीं।''
पीएम मोदी ने कहा, ''मैं जब मंच की तरफ आ रहा था, तो ये सोच रहा था कि कभी इसी भूमि पर गुरुदेव के कदम पड़े होंगे। यहां कहीं आसपास बैठकर उन्होंने शब्दों को कागज पर उतारा होगा, कभी कोई धुन, कोई संगीन गुनगुनाया होगा, कभी महात्मा गांधी से लंबी चर्चा की होगी, कभी किसी छात्र को जीवन का मतलब समझाया होगा।'' उन्होंने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। मोदी ने बताया कि जब वो तजिकिस्तान गए थे, तो वहां गुरुदेव की एक मूर्ति का लोकार्पण करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के लिए लोगों में जो आदरभाव मैंने देखा था, वो आज भी याद है। पीएम मोदी ने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर एक ग्लोबल सिटीजन पहले भी थे और आज भी हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर का गुजरात से भी एक विशेष संबंध था। उन्होंने कहा कि दुनिया के अनेक विश्वविद्यालयों में टैगोर आज भी अध्ययन का विषय हैं।
मोदी ने कहा कि 125 करोड़ देशवासियों ने 2022 तक न्यू इंडिया बनाने का संकल्प लिया है। इस संकल्प की सिद्धि में शिक्षा और महान शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे संस्थानों से निकले नौजवान, देश को नई ऊर्जा देते हैं, एक नई दिशा देते हैं। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के विजन के साथ-साथ न्यू इंडिया की आवश्यकताओं के अनुसार हमारी शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है। इस बजट में अगले चार साल में देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मोदी ने बताया कि शैक्षिक संस्थाओं को पर्याप्त सुविधाएं मिले, इसके लिए हजार करोड़ रुपये के निवेश के साथ उच्च शिक्षा अार्थिक एजेंसी शुरू की गई है। इससे प्रमुख शैक्षिक संस्थाओं में उच्च क्वालिटी के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश में मदद मिली है। इसके साथ ही पीएम ने कहा कि कम उम्र में ही इनोवेशन का माइंड सेट तैयार करने की दिशा में हमने देशभर के 2400 स्कूलों को चुना है। इन स्कूलों में अटल थिंकिंग लैब के माध्यम से हम 6वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों पर फोकस कर रहे हैं। इन लैब में बच्चों को आधुनिक तकनीक से परिचित करवाया जा रहा है।
मोदी ने छात्रों को प्रेरणा देते हुए कहा कि अगर आपके साथ चलने के लिए कोई तैयार ना भी हो, तब भी अपने लक्ष्य की तरफ अकेले ही चलते रहो। मोदी ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि अगर आप एक कदम चलेंगे तो चार कदम सरकार चलेगी। जनभागीदारी के साथ बढ़ते हुए ये कदम ही हमारे देश को उस मुकाम तक लेकर जाएंगे, जिसका सपना गुरुदेव ने भी देखा था। बता दें कि केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के कारण पीएम मोदी विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं। वह अपने चार साल के कार्यकाल में पहली बार दीक्षांत समारोह में शामिल हो रहे हैं।

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