कम लागत में श्री व कतार पद्धति से करें खेती, कमाई होगी लाखों में - .

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Thursday, 31 May 2018

कम लागत में श्री व कतार पद्धति से करें खेती, कमाई होगी लाखों में

कम लागत में श्री व कतार पद्धति से करें खेती, कमाई होगी लाखों में

कम पानी व खाद के अलावा सीमित लागत में किसानों को अधिक फसल के लिए कृषि विभाग से अलग-अलग क्लस्टर के एक हजार हेक्टेयर भूमि में धान, दलहन व तिलहन की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। कतार, श्री पद्धति, रोपा व लेही की बोनी से जिले के आठ हजार से भी अधिक किसान लाभान्वित हो सकेंगे। योजना के लिए अलग-अलग क्लस्टर में किसानों को चिन्हांकित किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य कतार व श्री पद्धति के अलावा लेही व रोपा की बोआई से समृद्ध खेती को बढ़ावा देना है।
परंपरागत खेती से किसान अब भी नहीं उबर सके हैं। अधिक से अधिक किसानों को तकनीकी खेती से जोड़ने के लिए कृषि विभाग की ओर से प्रदर्शनी योजना की तैयारी की जा रही है। जिले में अधिकांश किसान रोपा व लेही पद्धति से खेती करते हैं। श्री पद्धति व कतार बोनी से नहीं जुड़ने से किसानों को पᆬसल का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। कृषि विभाग अधिकारी की मानें तो एक ओर जहां सामान्य बुआई से एक एकड़ खेत में 16 क्विंटल धान उत्पादित होगा, वहीं श्री अथवा कतार बोनी सिस्टम से 20 से 22 क्विंटल खेती होती है। चयनित किसानों को खाद बीज की खरीदी में छूट दी जाएगी।
किसान अधिक से अधिक योजना का लाभ ले सकें, इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है। योजना से जोड़ने के लिए प्रत्येक कृषि विस्तार अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। जिले में इस वर्ष 98 हजार 382 हेक्टेयर में क्षेत्राच्छादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शासन से प्रत्येक वर्ष विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती है। विभागीय स्तर से योजना का प्रचार-प्रसार नहीं होने से किसान वंचित रह जाते हैं।
जैविक खाद देने का निर्णय :- कतार व श्री पद्धति से बोनी में शामिल किए जाने वाले किसानों को जैविक खाद की आपूर्ति की जाएगी। ढेंचा अथवा सनई के माध्यम खाद लगवाया जाएगा। लेही व रोपा की खेती करने वाले किसान भी जैविक खाद के लिए बीज निगम से बीज प्राप्त कर सकते हैं। विभागीय अधिकारी की मानें तो रसायनिक खाद में जितनी लागत लगती है, उससे 70 फीसदी कम जैविक खाद में लगेगी। जैविक खाद के लिए अब तक बीज नहीं आने से समस्या बनी हुई है।
हितग्राहियों के चिन्हांकन में भेदभाव :- कृषि विभाग से योजनाओं के चिन्हांकन में भेदभाव की जाती है। चाहे वह आत्मा परयोजना के तहत उन्नत प्रजाति का बीज वितरण हो या फिर सबसिडी के साथ दिया जाने वाला कृषि यंत्र। अधिकतर उन किसानों को योजना का लाभ दिया जाता है, जो पहले से समृद्ध हैं। अब तक विभाग से जितनी योजनाएं संचालित हुई है, उसका जमीनी क्रियान्वयन में विभागीय अधिकारियों की अपेक्षित रुचि नहीं लेने से व्यापक परिणाम नहीं मिल सका है।

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