भारतीय फुटबॉल टीम तक पहुंच रहीं इंदौर शहर की बेटियां - .

Breaking

Tuesday, 29 May 2018

भारतीय फुटबॉल टीम तक पहुंच रहीं इंदौर शहर की बेटियां

भारतीय फुटबॉल टीम तक पहुंच रहीं इंदौर शहर की बेटियां

करीब 15 साल पहले एक फिल्म प्रदर्शित हुई थी, 'बैंड इट लाइक बैकहम'। इसमें एक लड़की की कहानी थी, जो फुटबॉल की दीवानी है और परिवार से छिपकर अपने खेल को आगे बढ़ाती है। अब परिवार में बेटियों को फुटबॉल खेलने की अनुमति तो है, लेकिन शहर में उनके लिए उतने अवसर नहीं हैं, जितने होना चाहिए। इंदौर में करीब 80 फुटबॉल क्लब हैं, लेकिन चंद क्लबों में ही लड़कियों के लिए ट्रेनिंग उपलब्ध है। इससे लड़कियों की टीमें नहीं बन पातीं, नतीजतन लड़कियों के टूर्नामेंट भी नहीं होते। हैरानी की बात यह है कि फिर भी शहर की बेटियां भारतीय टीम तक पहुंच रही हैं। अब शहर के कुछ मैदानों पर लड़कियां अपनी ठोकर से दुनिया जीतने की तैयारियों में जुटी हैं।
नेहरू स्टेडियम में शाम के समय कई खेलों के खिलाड़ी इकट्ठा होते हैं। इनके बीच फुटबॉल खेलती लड़कियों के एक समूह पर अनायास ही नजर पड़ती है। यहां स्पोर्टिंग यूनियन में लड़कियों के लिए अलग से शिविर आयोजित किया गया है। कोच शैलेंद्र वर्मा बताते हैं, 'हमारे शहर में 80 के करीब फुटबॉल क्लब हैं, लेकिन लड़कियों के लिए अलग से शिविर फिलहाल हम लगाते हैं। हमारे शहर की लड़कियों में प्रतिभा की कमी नहीं है। पिछले साल इंदौर की अभिप्रिया वर्मा ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
ऐसी ही कई अन्य खिलाड़ी भी हैं। फुटबॉल समूह खेल है और खेलने के लिए साथी लड़कियां नहीं होने से भी इन्हें झिझक होती है। इसलिए हम लड़कियों के लिए अलग से शिविर लगाते हैं, जिससे हमारे शहर की बच्चियों को अवसर मिले। यहां अंकित रावत, कुमार वर्मा, रमन वर्मा प्रशिक्षण देते हैं। लक्ष्मणसिंह गौड़ फुटबॉल क्लब के प्रशिक्षक और राष्ट्रीय खिलाड़ी डैनी हतुनिया ने बताया, 'फुटबॉल का कोई भी टूर्नामेंट नहीं होता। शिक्षा विभाग की टीम का भी जो चयन होता है, उसके लिए भी टूर्नामेंट नहीं कराते। सीधे ट्रायल्स कराकर टीम का चयन हो जाता है। हमें बेटियों की टीमें बनाना होंगी, तभी मुकाबले होंगे और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।'
इंदौर की बेटी खेली भारतीय टीम में :- पिछले साल शहर की अभिप्रिया ने एसजेएफआई की भारतीय टीम में जगह बनाई थी और एडिलेड (ऑस्ट्रेलिया) में अंडर-19 टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। पिछले साल मुख्यमंत्री कप अंडर-17 स्पर्धा में यहीं की टीम ने इंदौर संभाग का प्रतिनिधित्व करते हुए खिताब जीता था।
लड़कियों के लिए टूर्नामेंट नहीं :- स्टेडियम में मां कनकेश्वरी क्लब के प्रशिक्षक राकेश सिरसिया बताते हैं, 'हमारे क्लब में भी कुछ लड़कियां सीखने आती हैं, जबकि आदिवासी क्लब में सुबह के सत्र में लड़कियां ट्रेनिंग लेती हैं। वैसे शहर में लड़कियों का कोई टूर्नामेंट नहीं होता है। हमें टीमें बनाकर टूर्नामेंट कराना होंगे, जिससे लड़कियां इस खेल में आगे आएंगी।

No comments:

Post a Comment

Pages