दिल के आर-पार हुआ चाकू, फिर भी डॉक्टरों ने सर्जरी कर लौटा दी जिंदगी - .

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Thursday, 24 May 2018

दिल के आर-पार हुआ चाकू, फिर भी डॉक्टरों ने सर्जरी कर लौटा दी जिंदगी

दिल के आर-पार हुआ चाकू, फिर भी डॉक्टरों ने सर्जरी कर लौटा दी जिंदगी

बहुत पुरानी लेकिन सटीक कहावत है- जाखो राखे साईंया मार सके न कोय...। शहर की रहने वाली 30 वर्षीय महिला पर उसे पति ने चाकू से वार किया। चाकू दिल के आरपार हो गया। ऐसे केस में व्यक्ति मौके पर ही दम तोड़ देता है या अस्पताल पहुंचाते वक्त रास्ते में सांस रुक जाती है, लेकिन डॉक्टर इसे चमत्कार मान रहे हैं कि जिसका बचना नामुमकिन था वह महिला बेहोशी के हालत में अस्पताल पहुंच गई और डॉक्टरों ने सर्जरी कर जान बचा ली। इसे रेयर ऑफ द रेयरेस्ट केस माना जा रहा है। बीते 10 साल के रिकॉर्ड में शहर में ऐसी सर्जरी नहीं हुई है।
घटना 13 मई की है। देवी (परिवर्ति नाम) के पति ने घरेलू झगड़े में उस पर चाकू से हमला कर दिया। वह जमीन में गिर गई। घर में मौजूद लोग बगैर देरी किए उसे तत्काल रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल ले गए। रविवार होने की वजह से कॉर्डियक सर्जन अस्पताल में मौजूद नहीं थे, लेकिन इमरजेंसी कॉल पर थे। अस्पताल संचालक डॉ. संदीप दवे ने सबसे पहले देवी को देखा, देखते ही कॉर्डियक सर्जन डॉ. विनोद आहुजा और डॉ. केके साहू को फोन किया, तत्काल आने को कहा। तब तक देवी का बीपी, पल्स रेट को कंट्रोल करने की कवायद शुरू कर दी गई थी।
कुछ मिनटों में दोनों कॉर्डियक सर्जन पहुंचे, प्रारंभिक जांच के बाद देवी को ओटी में ले जाया गया। करीब तीन घंटे की सांस रोक देने वाली पूरी कवायद के बाद परिजनों तक सूचना दी गई कि सर्जरी सफल रही। डॉ. दवे कहते हैं कि वह स्वस्थ है। हम आज भी आश्चर्य में हैं कि वह अस्पताल जीवित कैसे पहुंची। 12 घंटे वेंटिलेटर में रहने के बाद उसे आइसीयू में ले जाया गया, फिर डिस्चार्ज भी कर दिया गया।
कॉर्डियक सर्जन ने जैसा 'नईदुनिया' को बताया - कॉर्डियक सर्जन डॉ. विनोद आहुजा के मुताबिक ऐसे केस में अस्पताल पहुंचने के पहले मरीज की मौत हो जाती है, हम ब्रॉड डेथ घोषित कर देते हैं। डॉ. साहू का कहना है कि ऐसी सर्जरी किसी भी सर्जन के करियर में माइल-स्टोन होती है। ...तो इसलिए बची जान- डॉक्टर्स के मुताबिक चाकू से हमले के बाद खून का रिसाव शुरू हो चुका था, अगर खून दिल के बाहर की झिल्ली में भर जाता तो दिल पंपिंग बंद कर देता और मौत हो जाती। इस केस में यह भी एक प्लस पॉइंट था। ऑपरेशन के दौरान हार्ट लंग्स मशीन को इमरजेंसी में रखा गया था, लेकिन जरूरत नहीं पड़ी।
जिस स्थिति में लाया गया था हॉस्पिटल - बीपी- सामान्य व्यक्ति का बीपी 120/90 होता है, जबकि महिला का 60-70 के बीच पहुंच चुका था और यह तेजी से गिर रहा था।
सबसे पहले डॉक्टर्स ने क्या किया - गिरते बीपी को देख डॉक्टर्स ने सबसे पहले इसे नियंत्रित करने वाली दवा दी, कुछ ही देर में बीपी स्थिर होना शुरू हो गया। इसके बाद ईको कार्डियोग्राफी की गई, जिससे पता चल गया कि चाकू ने दिल के कितने अंदर तक घाव किया है। एक टीम ने ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में तब तक तैयारियां शुरू कर ली थीं।

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