गन्ना का बंपर उत्पादन, चीनी मिलें नहीं कर पा रहीं किसानों को भुगतान - .

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Tuesday, 24 April 2018

गन्ना का बंपर उत्पादन, चीनी मिलें नहीं कर पा रहीं किसानों को भुगतान

गन्ना का बंपर उत्पादन, चीनी मिलें नहीं कर पा रहीं किसानों को भुगतान


देश में चीनी की गिरती कीमतों की वजह से चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया बढ़कर 18,800 करोड़ से ज़्यादा हो गया है. अब सरकार इस संकट की मार झेल रहे लाखों गन्ना किसानों को राहत देने के लिए शुगर-लिंक्ड सब्सिडी से लेकर शुगर सेस लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है. गन्ना किसान फिर संकट में हैं. उपज बंपर हुई लेकिन चीनी मिल भुगतान नहीं कर पा रही हैं और उनका बकाया 19000 करोड़ रुपये के क़रीब पहुंच चुका है. Indian Sugar Mills Association के मुताबिक 15 अप्रैल तक देश में कुल 300 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है. जो पिछले सीज़न से 50% ज़्यादा है. ये देश में 30 सितंबर 2018 तक होने वाली कुल खपत से 50-लाख टन ज़्यादा है.

अब चीनी मिलों ने हाथ खड़ा करना शुरू कर दिया है. गिरती कीमतों की वजह से उन पर गन्ना किसानों का बकाया बढ़ता जा रहा है...इस संकट से निपटने के लिए गठित मंत्री समूह की पहली बैठक में तीन मुख्य विकल्पों पर बात हुई है जिसमें किसानों को 5 रूपये प्रति क्विंटल तक की प्रोडक्शन लिंक्ड सब्सिडी देने से लेकर चीनी मिल से निकलने वाले दाम पर सेस लगाने का प्रस्ताव शामिल है.  खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने एनडीटीवी से कहा, "शुगर सेस ज़रूरी होगा फंड इकट्ठा करने के लिए जिससे गन्ना किसानों को प्रोडक्शन लिंक्ड सब्सिडी देने के लिए".

दरअसल खाद्य मंत्रालय के मुताबिक 24 अप्रैल तक चीनी मिलों के पास गन्ना किसानों का बकाया फिर बढ़कर 18,804 करोड़ हो चुका है. मिल से निकलने पर फ़िलहाल चीनी के दाम 26 रू प्रति किलो से 27 रू किलो के आसपास हैं जबकि चीनी मिलों की लागत 32 रुपये प्रति किलो है. यानी क़रीब 5 रुपये का नुक़सान.


पासवान ने एनडीटीवी से कहा, "इस प्रस्ताव पर भी विचार हो रहा है कि चीनी मिलों के पास जो सरप्लस स्टाक है उसका इस्तेमाल इथेनाल के प्रोडक्शन के लिए किया जाए...इसके लिए इथेनाल पर GST 18% से घटाकर 5% करने पर विचार किया गया है." चीनी उद्योग में संकट बड़ा है...चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया जो अब तक 19000 करोड़ के करीब पहुंच गया है वो और बढ़ता जाएगा अगर सरकार ने जल्दी पहल नहीं की...ज़ाहिर है, चीनी उद्योग को इस संकट से उबारने के लिए सरकार को जल्दी फैसला लेना होगा.

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