कूड़े के टाइम बम पर दिल्ली : दिल्ली को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा - .

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Wednesday, 7 March 2018

कूड़े के टाइम बम पर दिल्ली : दिल्ली को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा

कूड़े के टाइम बम पर दिल्ली : दिल्ली को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा


सुप्रीम कोर्ट ने कूड़ा प्रबंधन को लेकर दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि पूरी दिल्ली कूड़े के ‘टाइम बम’ पर बैठी हुई है और सरकार इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठा रही है. ये दिल्ली के लोगों के साथ गंभीर अन्याय है.कोर्ट ने आगे कहा कि यही कूड़ा दिल्ली में सब बीमारियों की जड़ है. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार ने अपनी रिपोर्ट में ये नहीं बताया कि इससे निपटने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं? 

इस संबंध में 12 जनवरी को अफसरों की मीटिंग हुई, 9 फरवरी को कोर्ट से वक्त मांगा गया और अब पुरानी दलील ही दाखिल कर दी गई. कोर्ट ने प्रभावी कदम बताने के लिए दिल्ली सरकार को चार हफ्ते का वक्त देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि 19 मार्च को सुनवाई होगी, तब तक रिपोर्ट दाखिल करें.सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई कर रहा है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्यों को फटकार लगाई थी और कहा कि केंद्र के बनाए नियमों का राज्य ही पालन नहीं कर रहे हैं. अच्छा हो कि केंद्र अपने नियमों को वापस कर ले. 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दाखिल 845 पेज़ के हलफ़नामे पर कहा कि ये खुद में सॉलिड वेस्ट है और हम कचरा ढोने वाले नहीं हैं. इनमें ज्यादातर राज्यों को भेजे गए पत्र हैं. अगर दिल्ली को सफाई के मामले में रोल मॉडल मानोगे तो आप गलत हैं और इससे देशभर में प्रदूषण को लेकर भयावह हालात होंगे. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा था कि ऐसे ऑफिसर भेजिए जिसको पता हो.


सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कहा था कि पिछली मीटिंग की सारी जानकारी कोर्ट के साथ साझा करें. कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के हलफ़नामे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने केंद्र को तीन हफ्ते में सभी राज्यों की एडवायजरी कमेटी की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था. कोर्ट ने कहा कि हम आदेश देते हैं लेकिन कोई उसे लागू नहीं करता. 
दरअसल डेंगू और चिकनगुनिया पर संज्ञान लेकर सुनवाई के दौरान दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर हर राज्य में एडवाजयरी कमेटी बनाने के निर्देश दिए थे और केंद्र को कहा था कि वो इनकी रिपोर्ट एक साथ कर कोर्ट में दाखिल करे.

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