गुरु के ज्ञान ने बना दिया गुरु - .

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Wednesday, 21 February 2018

गुरु के ज्ञान ने बना दिया गुरु

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किसी भी व्यक्ति के जीवन को सही दिशा देने, उसे तरक्की की राह दिखाने में उसके गुरु की भूमिका अहम होती है। विद्यार्थियों के जीवन को संवारने वाले शिक्षक हर किसी के आदर्श होते हैं। उनके सिखाए सबक जिंदगी भर याद रहते हैं, हमें बेहतर इंसान बनाते हैं। शिक्षक दिवस पर एनबीटी ने खासतौर पर बात की शहर के शिक्षकों से और उनसे जानी उनके आदर्श गुरु की खूबियां, उनके सिखाए वे पाठ, जो आज उन्हें एक अच्छा शिक्षक बनने लिए प्रेरित करते रहते हैं। बातचीत में शिक्षकों ने माना कि उनके जीवन पर उनके पसंदीदा टीचर के सिखाए मूल्यों का काफी असर है, जिसे आज वे अपने छात्रों को सिखाने की कोशिश कर रहे हैं। पेश है शिक्षकों से एनबीटी संवाददाता योगेश तिवारी की बातचीत :
मेरी आदर्श शिक्षक रेनू माहेश्वरी मैम हैं। मैं अग्रवाल कॉलेज से हिंदी से एमए कर रही थी। मैम ने कविता के जरिए जिंदगी जीने का जो तरीका सिखाया, उससे मुझे काफी सपोर्ट मिला। मैम पढ़ाते हुए कहती थीं कि किसी भी भाषा पर आपकी पकड़ तभी होगी, जब आपका उससे लगाव होगा। इस लगाव के लिए आपको भाषा से जीवन जीने का तरीका सीखना होगा। अब मैं जब क्लास में पढ़ा रही होती हूं, तो मैम की यही बात याद आती है। मैं भी अपने छात्रों को कविताओं के जरिए हिंदी भाषा से जुड़ने की सीख देती हूं।
-पूजा त्यागी, के. एल. मेहता दयानंद कॉलेज
नेहरू कॉलेज के भौतिक विज्ञान के अध्यापक राम कुमार मेरे आदर्श शिक्षक हैं। अनुशासन को लेकर मैं काफी बेपरवाह था। राम कुमार सर ने बिना डांटे मुझे ही नहीं पूरी कक्षा को जिंदगी व करियर में अनुशासन और समर्पण का महत्व सिखा दिया। विद्यार्थियों के लिए अध्यापक का प्यार और जिम्मेदारियां क्या होती हैं, यह भी सर ने ही सिखाया। इसका असर यह हुआ कि पूरी कक्षा नियमित तौर पर भौतिक विज्ञान पढ़ने के लिए उनकी क्लास में आने लगी। अब मैं भी अपने स्टूडेंट्स को सर के बताए हुए सुझाव देता रहता हूं।
-प्रमोद कुमार, डीएवी शताब्दी कॉलेज
जो शिक्षक आपके आदर्श होते हैं, उनका कोई न कोई गुण आपके व्यवहार में शामिल हो जाता है। छात्र व अध्यापक के बीच संवाद की परंपरा मुझे डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ में सीखने को मिली। यहां मुझे प्रफेसर धमीजा ने इंग्लिस लैंग्वेज पढ़ाई। भाषा पर उनकी पकड़ और छात्रों की समस्याओं, सवालों के लिए मौजूदगी ने एक अलग अहसास करवाया। मैं भी छात्रों के बीच एक स्वच्छ और बेहतर संवाद का माहौल कायम रखने की कोशिश करता हूं। इससे छात्रों की आधी समस्याएं और उनकी झिझक खुद-ब-खुद दूर हो जाती है।
-अरुण भगत, डीएवी शताब्दी कॉलेज
मैं कोटा में पढ़ती थी, मैथ्स में कमजोर थी। 10 वीं में कम नंबर आए, तो सभी शिक्षकों ने कहना शुरू कर दिया कि तुम मैथ्स छोड़ दो। लेकिन, वहां के मैथ्स टीचर गणेश सर ने यह कहकर आत्मविश्वास भरा कि तुम मैथ्स में सबसे अच्छा करोगी। पहले से एक राय बनी हुई थी कि मैथ्स के टीचर डांटते बहुत हैं। सर ने सारे मिथक तोड़कर ऐसा पढ़ाया कि मेरा सबसे पंसदीदा विषय ही गणित बन गया। अब जब मैं खुद टीचर हूं, तो हर एक छात्र को गणित से न डरने की सलाह देती हूं। गणेश सर से मिली यह सीख मैं हमेशा याद रखती हूं।
-वर्षा रॉय, मॉडर्न दिल्ली पब्लिक स्कूल

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