‘ग्लाइड बम’ का टेस्ट सफल, रेंज 100 किमी; जल्द शामिल होगा एयरफोर्स में - .

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Monday, 12 February 2018

‘ग्लाइड बम’ का टेस्ट सफल, रेंज 100 किमी; जल्द शामिल होगा एयरफोर्स में

‘ग्लाइड बम’ का टेस्ट सफल, रेंज 100 किमी; जल्द शामिल होगा एयरफोर्स में

जोधपुर. साइंटिस्ट्स ने देश में बने एक खास तरह के बम का शुक्रवार को कामयाब टेस्ट किया। यह बम फाइटर प्लेन से दागने पर 100 किमी दूर स्थित अपने टारगेट पर सटीक निशाना साध सकता है। इस ग्लाइड बम की मदद से हमारे फाइटर प्लेन दुश्मन की रेंज में आए बगैर ही उसके क्षेत्र में तबाही मचा सकते है। तीन कामयाब टेस्टों के बाद अब ग्लाइड बम साल के अंत तक एयरफोर्स में शामिल कर लिया जाएगा।
4 साल पहले शुरू हुआ था काम
– डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने 2013 में ग्लाइड बम बनाने पर काम शुरू किया। पिछले साल दिसंबर में थार के रेगिस्तान में इसका दूसरा कामयाब टेस्ट किया गया। पहला टेस्ट बेंगलुरु में किया गया था।
– तीसरा टेस्ट शुक्रवार को चांदीपुर रेंज में किया गया। जिसमें बम ने सत्तर किलोमीटर दूर स्थित अपने टारगेट पर सटीक निशाना लगाया।
– भारत ने दो तरह के ग्लाइड बम विकसित किए है। इनमें से पंखों वाला गरु-थमा, जो सौ किलोमीटर की दूरी तक मार करता है। वहीं बगैर पंखों वाला गरुडा 30 किलोमीटर तक सटीक निशाना लगाने में कैपेबल है। ये बम एक बार में एक हजार किलो के विस्फोटक ले जा सकता है।
ग्लाइड बम के ये हैं फायदे
इंडियन एयरफोर्स के लिए ये बम बहुत फायदेमंद साबित होंगे। इसकी मदद से फाइटर एयरक्राफ्ट दुश्मन के खतरे वाले इलाके में गए बगैर उसे तबाह कर सकेंगे। इससे फाइटर प्लेन के नुकसान पहुंचने का खतरा काफी कम हो जाएगा।

ऐसे काम करता है ग्लाइड बम
– ग्लाइड बम में एक्सप्लोसिव के अलावा 4 हिस्से होते है। इसमें एक इलेक्ट्रॉनिक सेंसर सिस्टम, कंट्रोल सिस्टम, कंट्रोल किए जा सकने वाले पंखे और एक बैटरी होती है।
– जब इसे किसी फाइटर प्लेन से छोड़ा जाता है तो यह एक ग्लाइड के समान आसमान में आगे बढ़ता है। इसमें मिसाइल के समान गति देने का कोई सिस्टम नहीं होता, लेकिन तेज रफ्तार वाले फाइटर से छोड़े जाने के कारण यह उससे रफ्तार हासिल कर लेता है। इसमें लगे पंखे ग्लाइड बम को नीचे गिरने नहीं देते और यह एक समान लेवल पर आगे बढ़ता रहता है।
– बम के हवा में उड़ने के दौरान कंट्रोल रूम से इसे डायरेक्शन दिया जाता है। इसमें लगा सेंसर टारगेट की पहचान करता है और इसके कंट्रोल सिस्टम को जानकारी देता है। बम का कंट्रोल सिस्टम उसकी दिशा मोड़ने का काम करता है। इसमें लगे बैटरी से चलने वाले पंखों के जरिए इसकी दिशा को टारगेट की तरफ मोड़ा जाता है।
– टारगेट के ऊपर इसके पंखों को बंद कर दिया जाता है। टारगेट पर पहुंचते ही इसमें ब्लास्ट होता है। इससे भारी नुकसान पहुंचता है।

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