केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, 'सिनेमाघरों में फिलहाल राष्ट्रगान अनिवार्य न हो' - .

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Monday, 8 January 2018

केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, 'सिनेमाघरों में फिलहाल राष्ट्रगान अनिवार्य न हो'

केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, 'सिनेमाघरों में फिलहाल राष्ट्रगान अनिवार्य न हो'


केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान को फिलहाल अनिवार्य ना बनाया जाए. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि सरकार ने अंतर मंत्रालयी कमेटी बनाई है, जो छह महीने में अपने सुझाव देगी. इसके बाद सरकार तय करेगी कि कोई नोटिफिकेशन या सर्कुलर जारी किया जाए या नहीं. केंद्र ने कहा है कि तब तक 30 नवंबर, 2016 के राष्ट्रीय गान के अनिवार्य करने के आदेश से पहले की स्थिति बहाल हो. मंगलवार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. गौरतलब है कि 23 अक्टूबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा कि सिनेमाघरों और अन्य स्थानों पर राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य हो या नहीं, ये वो तय करे. इस संबंध में कोई भी सर्कुलर जारी किया जाए तो सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से प्रभावित ना हों. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि ये भी देखना चाहिए कि सिनेमाघर में लोग मनोरंजन के लिए जाते हैं, ऐसे में देशभक्ति का क्या पैमाना हो, इसके लिए कोई रेखा तय होनी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस तरह के नोटिफिकेशन या नियम का मामला संसद का है. ये काम कोर्ट पर क्यों थोपा जाए?

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि लोग सिनेमाघर सिर्फ मनोरंजन के लिए जाते हैं. हम क्यों देशभक्ति को अपनी बांहों में रखें. ये सब मामले मनोरंजन के हैं. फ्लैग कोड काफी नहीं है, सरकार को एग्जीक्यूटिव आदेश जारी करने चाहिए. कोर्ट क्यों इसका बोझ उठाए?  लोग शॉर्ट्स पहनकर सिनेमा जाते हैं, क्या आप कह सकते हैं कि वो राष्ट्रगान का सम्मान नहीं करते. आप ये क्यों मानकर चलते हैं कि जो राष्ट्रगान के लिए खड़ा नहीं होता, वो देशभक्त नहीं होते. 30 नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रगान, यानी 'जन गण मन' से जुड़े एक अहम अंतरिम आदेश में कहा था कि देशभर के सभी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजेगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राष्ट्रगान बजते समय सिनेमाहॉल के पर्दे पर राष्ट्रीय ध्वज दिखाया जाना भी अनिवार्य होगा तथा सिनेमाघर में मौजूद सभी लोगों को राष्ट्रगान के सम्मान में खड़ा होना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रगान राष्ट्रीय पहचान, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक देशभक्ति से जुड़ा है. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, ध्यान रखा जाए कि किसी भी व्यावसायिक हित में राष्ट्रगान का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसके अलावा किसी भी तरह की गतिविधि में ड्रामा क्रिएट करने के लिए भी राष्ट्रगान का इस्तेमाल नहीं होगा तथा राष्ट्रगान को वैरायटी सॉन्ग के तौर पर भी नहीं गाया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने ये भी कहा था कि ये बात साफ है कि सभी नागरिकों का दायित्व है कि वह संविधान के आदर्श को मानें. अदालत ने कहा था कि समय की मांग है कि देश के नागरिक महसूस करें कि वह देश में रहते हैं और उनका कर्तव्य है कि वह राष्ट्रगान का सम्मान करें जो कि संवैधानिक देशभक्ति और राष्ट्रीयता का प्रतीक है. व्यक्तिगत सोच के नाम पर इस मामले में आजादी नहीं दी जा सकती.

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