उत्तर भारत में टला नहीं बड़े भूकंप का खतरा, वैज्ञानिक कर चुके हैं आगाह - .

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Wednesday, 6 December 2017

उत्तर भारत में टला नहीं बड़े भूकंप का खतरा, वैज्ञानिक कर चुके हैं आगाह



उत्तराखंड में बुधवार रात आए भूकंप से लोग भयभीत हैं। भूकंप आते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। चिंता इस बात की है कि पहाड़ में अभी भी बड़े भूकंप का खतरा टला नहीं है।
गढ़वाल हिमालय में 8 रिक्टर स्केल से बड़ा भूकंप आने की आशंका है। इस क्षेत्र में सात सौ सालों से बड़ा भूकंप नहीं आया, जिससे बड़े भूकंप की आशंका लगातार बढ़ रही है। समूचा उत्तर भारत इस भूकंप की चपेट में आएगा और सबसे अधिक नुकसान तराई के क्षेत्रों में होगा। पिछले दिनों देहरादून में आयोजित भूकंप वैज्ञानिकों की कार्यशाला में तकरीबन सभी वैज्ञानिकों ने बड़े भूकंप की आशंका जताई। वैज्ञानिकों ने कहा कि गढ़वाल हिमालय में आठ रिक्टर स्केल से ज्यादा बड़े भूकंप के लायक ऊर्जा संकलित हो गई है। इस क्षेत्र में जो छोटे भूकंप आ रहे हैं उनसे नगण्य ऊर्जा रिलीज हो रही है। इसलिए बड़े भूकंप का खतरा निरंतर बना हुआ है।
उत्तरकाशी जैसे 900 भूकंप के बराबर होगा
नेशनल सेंटर फॉर सेस्मोलॉजी के निदेशक डॉ. विनीत गहलौत ने बताया कि गढ़वाल हिमालय में जिस भूकंप की आशंका है उसकी तीव्रता उत्तरकाशी में 1991 में आए भूकंप से नौ सौ गुना ज्यादा होगी। उत्तरकाशी भूकंप में इंडियन प्लेट आधा मीटर खिसकी थी। जबकि जिस भूकंप की आशंका है उसमें इंडियन प्लेट 10 मीटर तक खिसक सकती है। इस भूकंप का रेप्चर एरिया 250 किमी तक होने की आशंका है।  
1344 के बाद नहीं आया बड़ा भूकंप  
वाडिया भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक जेजी पेरूमल ने भी बड़े भूकंप की आशंका जताई। उन्होंने अपने अध्ययन में बताया कि सेंट्रल सेस्मिक गैप में 1344 से अभी तक बड़ा भूकंप नहीं आया। सेंट्रल सेस्मिक गैप 1905 के कांगडा भूकंप  1934 में आए बिहार नेपाल भूकंप के बीच का 350 किमी लम्बा क्षेत्र है। 1344 के भूकंप क केंद्र रामनगर के पास था जिसका असर पंजाब के बाजपुर तक होने के प्रमाण मिले हैं।  
कांगड़ा जैसा भूकंप आया तो 10 लाख मौतें 
वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में बताया कि 1905 में कांगड़ा में आया भूकंप यदि आज आए तो 10 लाख लोगों की मौत होगी। यदि इसी स्केल का भूकंप उत्तराखंड में आए तो मौत का आंकड़ा इससे भी ज्यादा होगा। क्योंकि उत्तराखंड का जनसंख्या घनत्व हिमाचल से कहीं ज्यादा है। 

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