सिंगापुर के रक्षा मंत्री ने तेजस में भरी उड़ान, एयरकाफ्ट को बताया 'शानदार' - .

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Tuesday, 28 November 2017

सिंगापुर के रक्षा मंत्री ने तेजस में भरी उड़ान, एयरकाफ्ट को बताया 'शानदार'

सिंगापुर के रक्षा मंत्री ने तेजस में भरी उड़ान, एयरकाफ्ट को बताया 'शानदार' 


सिंगापुर के रक्षा मंत्री एन ई हेन ने बंगाल में भारतीय वायुसेना के एयरबेस कलाईकोंडा से देश में बने लाइट कॉम्बेट एयरकाफ्ट तेजस में उड़ान भरी. सिंगापुर के रक्षा मंत्री ने करीब 35 मिनट तक ये उड़ान भरी. एन ई हेन भारत और सिंगापुर के बीच 14वें दौर के वायुसेना सैन्याभ्यास के लिए आए हुए हैं.

रक्षा मंत्री हेन को तेजस में नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर के एयर वाइस मार्शल एपीसिंह ने उड़ाया. इसकी तारीफ करते हुए सिंगापुर के रक्षामंत्री ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा कि जैसे वो कार की सवारी कर रहे है ना कि लड़ाकू विमान की. हलांकि जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सिंगापुर अपनी वायुसेना के लिए तेजस खरीदेगा तो उन्होंने कहा कि वह पायलट नहीं हैं और इस पर फैसला तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग लेंगे. सिंगापुर वायुसेना के पास एयरस्पेस की कमी है इसलिए वह भारत में 2004 से सैन्य अभ्यास करता है. सिंगापुर वायुसेना कलाईकोंडा में एफ-16 लड़ाकू विमान लेकर आई है.

इससे पहले पहली बार जब तेजस ने बहरीन एयर शो में हिस्सा लिया था तो कई देश चकित रह गए थे. तेजस के प्रदर्शन को देखकर श्रीलंका और मिस्र जैसे कई देशों ने इसे खरीदने में रुचि दिखाई है. हालांकि तेजस बनाने वाली हिंदुस्तान एयरोनेटिक्स लिमिटेड के सूत्रों का कहना है कि पहले वह भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करेंगे और इसके बाद अगर सरकार की हरी झंडी मिलेगी तो इस बारे में सोचेंगे. आपको बता दें कि पिछले साल ही भारतीय वायुसेना में तेजस को शामिल किया गया है. एचएएल भी अभी तक वायुसेना को केवल पांच ही तेजस दे पाया है. वैसे हाल के दिनों में तेजस को लेकर देश में कई सवाल भी उठे हैं. कहा जा रहा है कि वायुसेना ने तेजस के अपग्रेडेड वर्जन को लेने से मना कर दिया है. फिलहाल तेजस को अभी तक फाइनल ऑपरेशनल क्लिरेयन्स नही मिला है. इसका सीधा मतलब है कि तेजस लड़ाई के लिए तैयार नहीं है. 


देश में बने तेजस में अभी तक किसी भारतीय रक्षा मंत्री ने उड़ान नहीं भरी है, लेकिन  70 साल के सिंगापुर के रक्षा मंत्री ने जिस तरह से तेजस पर विश्वास दिखाया, उससे तेजस बनाने वाली एचएएल के हौसले बुलंद हैं. वैसे इस उड़ान के अलावा भारत और सिंगापुर के बीच रक्षा सहयोग का मसला कहीं ज़्यादा गंभीर है. इस सहयोग पर 2003 में दस्तख़त हुए थे और 2015 में इसे आगे बढ़ाया गया जब प्रधानमंत्री मोदी दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 50वीं जयंती मनाने पहुंचे. सिंगापुर के साथ यह रणनीतिक साझेदारी भारत की लुक ईस्ट पॉलिसी का हिस्सा है.सिंगापुर के साथ  ऐतिहासिक संबंधों के अलावा दक्षिण-पूर्वी एशियाई क्षेत्र में चीन के बढ़ते दख़ल के लिहाज से ये बेहद अहम है. 

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