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दृढ़ इच्छाशक्ति, स्पष्ट दृष्टिकोण के मालिक हैं, लगन के साथ अथक परिश्रम करते हैं PM मोदी : प्रणब मुखर्जी

दृढ़ इच्छाशक्ति, स्पष्ट दृष्टिकोण के मालिक हैं, लगन के साथ अथक परिश्रम करते हैं PM मोदी : प्रणब मुखर्जी


लगभग चार दशक लम्बे अपने सार्वजनिक जीवन में चार अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके पूर्व राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी ने मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  की तारीफों के पुल बांधे, लेकिन साथ ही बीजेपी के 'कांग्रेसमुक्त भारत' के लक्ष्य को लेकर चिंता भी व्यक्त की. गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री के बीच रिश्ते काफी मधुर रहे हैं, और इन रिश्तों का गर्माहट का अंदाज़ा डॉ मुखर्जी के राष्ट्रपति पद से मुक्त होते वक्त दोनों नेताओं द्वारा की गई एक-दूसरे की तारीफों से भी हो जाता है. अब खुद को 'भारत का नागरिक' (citizen of India) कहकर बुलाने वाले डॉ मुखर्जी ने NDTV को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि नरेंद्र मोदी में "बेहद मेहनत से काम करने की अद्भुत क्षमता है..." उन्होंने कहा कि इसके साथ ही अपने उद्देश्यों को हासिल करने के लिए उनमें दृढ़ इच्छाशक्ति भी भरपूर है, और उनका दृष्टिकोण भी कतई स्पष्ट है. डॉ मुखर्जी के अनुसार, प्रधानमंत्री जानते हैं कि उन्हें क्या हासिल करना है, और वह उसे पाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं.
 
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रशासन, राजनैतिक गतिशीलता तथा विदेश नीति की जटिलताओं को संसद का कोई भी अनुभव हुए बिना समझ लिया. डॉ मुखर्जी के अनुसार, "याद रखना चाहिए, उनके लिए संसद का कुछ साल का भी अनुभव पाए बिना एक राज्य से यहां आना आसान नहीं था..." प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हीं शुरुआती दिनों को याद करते हुए डॉ मुखर्जी का आभार व्यक्त किया था. डॉ मुखर्जी द्वारा लिखित पुस्तक के जुलाई में हुए लॉन्च के समय प्रधानमंत्री ने कहा था, "प्रणब दा की अंगुली पकड़कर दिल्ली की ज़िन्दगी में अपने आप को सेट करने में बहुत बड़ी सुविधा मिली..."

पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को लेकर प्रधानमंत्री की समझ के बारे में उदाहरण देते हुए डॉ मुखर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेने से पहले उन्होंने (नरेंद्र मोदी ने) सुझाव दिया था कि समारोह में सभी सार्क देशों के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए. डॉ मुखर्जी ने कहा, "यह अनूठा सुझाव था, और मैं तुरंत तैयार हो गया..." डॉ. मुखर्जी पहले भी कह चुके हैं कि अलग-अलग विचारधाराओं की तरफ झुकाव के बावजूद उनके तथा प्रधानमंत्री के कामकाजी रिश्ते पर कोई फर्क नहीं पड़ा था. राष्ट्रपति के रूप में अपनी फेयरवेल स्पीच में उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री पूरी 'लगन और ऊर्जा' के साथ देश में 'आमूलचूल बदलाव' लाने में जुटे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा लिखा विदाई पत्र भी ट्विटर पर सार्वजनिक किया था, और लिखा था कि उसने (खत ने) उनके 'दिल को छू लिया...'

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