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इन डॉक्टरों को सबसे पहले 'इंसान' बनाए जाने की जरूरत है

गोरखपुर त्रासदी: इन डॉक्टरों को सबसे पहले 'इंसान' बनाए जाने की जरूरत है 
एक लोक कल्याणकारी देश था. देश का एक गरीब आदमी अपना इलाज कराने वहां के सबसे बड़े अस्पताल पहुंचा. अंदर दाखिल होते ही उसे दो ऐरो नजर आए. एक पर लिखा था- इलाज आम आदमी के लिए. दूसरे पर लिखा था- इलाज खास आदमी के लिए.
गरीब आदमी स्वभाविक रूप से आम आदमी वाले दरवाजे की ओर बढ़ा. वह चलता चला गया. काफी देर बाद उसे फिर दो बोर्ड नजर आए- इलाज गरीबों के लिए और इलाज बहुत ज्यादा गरीबों के लिए. वह आदमी बहुत ज्यादा गरीबों वाले दरवाजे में दाखिल हुआ और बहुत देर चलने के बाद उसे महसूस हुआ कि अब वह अस्पताल से बाहर आ चुका है और दोबरा अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं है.
यह यूरोपीय कहानी बहुत पुरानी है. लेकिन भारत पर पूरी तरह लागू होती है. स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भारत की क्या स्थिति है. यह जानने के लिए कोई ग्लोबल इंडेक्स देखने की जरूरत नहीं है. हमारे और आपके अनुभव ही काफी हैं. सरकारी अस्पतालों के धक्के और लंबी कतारों से मुक्ति हमेशा से इंडियन मिडिल क्लास की ख्वाहिश रही है. उदारीकरण ने बहुत हद तक मुक्ति दिला थी. आज फाइव स्टार होटल जैसे दिखने वाले चमचमाते अस्पताल हर शहर में हैं, लेकिन इलाज?
प्राइवेट अस्पतालों की लूट
घटिया इलाज, लापरवाही और व्यवस्थित लूट के अनगिनत अनुभवों से हम रोजमर्रा की जिंदगी में लगातार रूबरू होते हैं. ये अनुभव आपको याद दिलाते हैं कि जब मिडिल क्लास आदमी की ये दुर्दशा है तो फिर गरीबों का हाल कैसा होगा? प्राइवेट अस्पतालों के अपने कई अनुभवों से एक अनुभव मैं आपके साथ बांट रहा हूं.
बात करीब पांच साल पुरानी है. कमर और पैरो में बेइंतेहा दर्द की वजह से मेरी मां ने बिस्तर पकड़ लिया था. डॉक्टरों को शक था कि रीढ़ की हड्ढी से जुड़ी कोई समस्या है. मैने उन्हे दिल्ली के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में दाखिल कराया. जांच शुरू हुई. अस्थि रोग विशेषज्ञ ने कहा- रीढ़ की हड्डी में हल्की चोट है. लेकिन मुख्य समस्या चोट नहीं ऑस्टियोपोरोसिस है. तीन महीने तक बिस्तर पर रहना होगा. कुछ दवाइयां चलेंगी, उसके बाद पूरी तरह ठीक हो जाएंगी.
उसके अगले दिन मेरे पास अस्पताल से फोन आया- न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट के फलां डॉक्टर ने आपको बुलाया है, फौरन आकर मिलिए. मैं वहां पहुंचा तो डॉक्टर साहब बहुत चिंतित मुद्रा में बैठे. मुझे देखते ही उन्होंने कहा, फौरन तीन लाख रुपए जमा करा दीजिए. कल आपकी माताजी का ऑपरेशन होगा. मैंने हैरान होकर पूछा- अचानक क्या हो गया? उन्होने कहा, बहुत बुरी स्पाइनल इंजरी है, बिना सर्जरी के ठीक नहीं होगी. मैने कहा, लेकिन इतनी जल्दी मैं किस तरह निर्णय ले सकता हूं. उन्होंने रुखाई से कहा, मर्जी है आपकी, अपने पेशेंट को पूरी तरह चंगा देखना चाहते हैं या बिस्तर पर पड़े-पड़े मारना चाहते हैं.

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