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मॉनसून सत्र को ठप करने की तैयारी में है कांग्रेस

मॉनसून सत्र को ठप करने की तैयारी में है कांग्रेस 
मॉनसून सत्र के पहले ही दिन प्रधानमंत्री ने जीएसटी स्पिरिट से संसद में काम करने की अपील की थी. मतलब कि जिस तरह जीएसटी के लिए सदन एकसाथ आया था, उसी तरह बाकी मुद्दों पर भी काम हो. सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए इसे विपक्ष को साधने की कोशिश के तौर पर देखा गया. लेकिन उनकी कवायद का असर होता नहीं दिख रहा है.
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है. कांग्रेस की रणनीति पूरे सत्र को ठप करने की है. लेकिन मुद्दा जीएसटी का नहीं, जिका वायरस का होगा.
कांग्रेस जिका वायरस, किसानों के मुद्दे और तथाकथित गोरक्षकों की तरफ से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हो रहे हमले जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है.
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, एआईसीसी के रिसर्च विभाग ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की निगरानी में मॉनसून सत्र को लेकर एक डोजियर तैयार किया है जिसमें सरकार को घेरने के फॉर्मूले का जिक्र है.
कांग्रेस की रणनीति के मुताबिक, इन मुद्दों को संसद के दोनों सदनों में प्रतिदिन उठाकर सरकार को पूरी तरह से किनारे करने की कोशिश की जाएगी. हंगामे के चलते सदन न चलने देने की रणनीति को और धार देने की कोशिश होगी.
अलग-अलग राज्यों में तथाकथित गोरक्षकों की तरफ से लगातार हमले की घटना परेशान करने वाली हैं. खासतौर से इस हमले का शिकार अल्पसंख्यक समुदाय के ही लोग हो रहे हैं. हालांकि प्रधानमंत्री की तरफ से इस मुद्दे पर तीन-तीन बार अपनी तरफ से कड़ी कारवाई करने की बात भी कही गई है. लेकिन, कांग्रेस इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही है.
कांग्रेस को लगता है कि गोरक्षा पर हिंसा के नाम पर हंगामा विपक्ष को एकजुट कर सरकार को पीछे धकेल सकता है. लिहाजा इस मुद्दे को उठाने की तैयारी है.

कुछ महीने पहले ही गुजरात में जिका वायरस पाए जाने की पुष्टि हुई थी. अब कांग्रेस इस मुद्दे पर भी सरकार की लापरवाही की बात को उठाकर हंगामा करने की तैयारी में है.
ये कांग्रेस की हताशा को ही दिखाता है, जिसमें वो जिका वायरस जैसे मुद्दे को भी उठाकर हंगामे की अपनी रणनीति को आगे बढ़ा रही है.
कांग्रेस ने किसानों के मुद्दे को भी संसद के दोनों सदनों में उठाकर कार्यवाही ठप करने का प्लान तैयार किया है. मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में मौत का मामला हो या फिर किसानों की तरफ से लगातार हो रही आत्महत्या का मामला, कांग्रेस को लगता है कि इन मुद्दों पर सरकार को घेरा जा सकता है. कांग्रेस की रणनीति इस मुद्दे पर भी हंगामा कर संसद न चलने  देने की ही लग रही है.
हालांकि, कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनपर कांग्रेस खुद बैकफुट पर है और चाहकर भी सरकार पर हमलावर नहीं हो पा रही है. कांग्रेस पहले आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही थी. लेकिन, बाद में कांग्रेस ने अपने कदम पीछे खींच लिए.
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पहले जीएसटी के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी थी. लेकिन, बाद में कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बदलाव किया. कांग्रेस के रिसर्च विभाग के डोजियर के मुताबिक, जीएसटी के मुद्दे पर सरकार को घेरने की उसकी रणनीति उल्टी पड़ सकती है. इस मुद्दे पर पहले ही विपक्ष बिखरा है.
कांग्रेस की तरफ से जीएसटी पर विशेष सत्र के बहिष्कार करने के बावजूद जेडीयू और एनसीपी जैसे कई विपक्षी दल इस विशेष सत्र में पहुंचे थे. अब जीएसटी पर न जनता का मूड सरकार के खिलाफ है, न ही आर्थिक संस्थाएं ही जीएसटी पर सरकार के खिलाफ दिख रही हैं.
कांग्रेस के नेताओं को इस बात का डर सता रहा है कि अगर जीएसटी के मुद्दे पर हंगामा या फिर चर्चा भी हुई तो जीएसटी का क्रेडिट फिर से सरकार को मिलेगा और कांग्रेस के हाथी खाली रह जाएंगे. लिहाजा कांग्रेस ने जीएसटी पर हंगामे और चर्चा से किनारा ही कर लिया है.
दूसरे आर्थिक मुद्दों पर फिलहाल कांग्रेस भ्रमित दिख रही है. नोटबंदी के मसले पर कांग्रेस को पहले ही मुंह की खानी पड़ी है. नोटबंदी के बाद हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद उसके पास अब नैतिक बल नहीं बचा है जिसके दम पर वो फिर से नोटबंदी के मुद्दो को उठाए, लिहाजा कांग्रेस ने इस मुद्दे से फिलहाल किनारा कर लिया है.
इस वक्त चीन के साथ डोकलाम इलाके में जारी तनाव के बाद माना जा रहा था कि कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार पर हमलावर होगी. लेकिन, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के भारत में चीनी राजदूत के साथ मुलाकात की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा.
कांग्रेस को लगा कि ये दांव भी उल्टा पड़ सकता है और चीन के मुद्दे पर चर्चा होने पर सरकार उल्टा कांग्रेस पर ही हमलावर हो सकती है. लिहाजा कांग्रेस ने इस मुद्दे से किनारा ही कर लिया.
कांग्रेस सांस्कृतिक फासीवाद का आरोप बीजेपी पर लगाती रही है. केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने का कोई भी मौका कांग्रेस नहीं खोना चाहती. इस बार कांग्रेस के लिए इस मुद्दे पर भी आगे बढ़ पाना काफी मुश्किल हो गया है.
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को केंद्र में रखकर बनी फिल्म इंदु सरकार का जिस अंदाज में कांग्रेस के कैडर्स की तरफ से विरोध हो रहा है, उसको लेकर कांग्रेस घिरी हुई है. उसे इस बात का डर भी है कि सदन के भीतर अगर सांस्कृतिक फासीवाद के नाम पर बीजेपी को घेरने की कोशिश की गई तो इंदु सरकार पर हुआ हंगामा कांग्रेस को अपने ही जाल में उलझा कर रख देगा.
अब कांग्रेस पूरी तरह से ऐसी स्थिति में फंसी हुई है जहां वो न जीएसटी का मुद्दा उठा पा रही है, न ही चीन का मुद्दा. कांग्रेस के पास सरकार को घेरने का कोई बड़ा मुद्दा तो नहीं दिख रहा है लिहाजा अब जीएसटी के बजाए जिका वायरस जैसे मुद्दे के सहारे संसद ठप करने की तैयारी है.


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